Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जेलीफिश बुढ़ापे के बाद बच्चा कैसे बन जाती है मेघालय में खूनी संघर्ष! GHADC चुनाव के दौरान भारी हिंसा, पुलिस फायरिंग में 2 की मौत; सेना ने संभाला ... CBI का अपने ही 'घर' में छापा! घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा गया अपना ही बड़ा अफसर; 'जीरो टॉलरेंस' नीति के ... Aditya Thackeray on Middle East Crisis: आदित्य ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगा स्पष्टीकरण, बोले—... Bengal LPG Crisis: सीएम ममता बनर्जी का बड़ा फैसला, घरेलू गैस की सप्लाई के लिए SOP बनाने का निर्देश; ... नोएडा के उद्योगों पर 'गैस संकट' की मार! फैक्ट्रियों में लगने लगे ताले, संचालकों ने खड़े किए हाथ; बोल... Just Married! कृतिका कामरा और गौरव कपूर ने रचाई शादी; बिना किसी शोर-शराबे के लिए सात फेरे, देखें कपल... Lok Sabha News: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज, सदन में ध्वनिमत से... होमुर्ज की टेंशन खत्म! भारत ने खोजा तेल आपूर्ति का नया 'सीक्रेट' रास्ता; अब खाड़ी देशों के बजाय यहाँ... Temple LPG Crisis: देश के बड़े मंदिरों में भोग-प्रसाद पर संकट, एलपीजी की किल्लत से थमी भंडारों की रफ...

अफगानिस्तान में मानवीय संकट की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट में आगाह किया गया

न्यूयार्कः संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में गहराते मानवीय संकट को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। यूएन की नवीनतम रिपोर्ट बताती है कि देश की आधी से अधिक आबादी, जो कि लाखों लोगों के बराबर है, को आगामी सर्दियों के महीनों में खाद्य असुरक्षा के गंभीर स्तरों का सामना करना पड़ सकता है। यह संकट देश पर तालिबान के नियंत्रण के बाद से आर्थिक पतन, अंतर्राष्ट्रीय सहायता के निलंबन और बैंकिंग प्रणाली के जमने का सीधा परिणाम है।

अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह से विदेशी सहायता पर निर्भर थी, और इस सहायता के अचानक बंद हो जाने से देश में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और गरीबी बढ़ी है। बैंकों में तरलता की कमी है, जिससे लोग अपने पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं और व्यापार लगभग ठप हो गया है। इसके अलावा, देश लगातार गंभीर सूखे का सामना कर रहा है, जिसने कृषि को तबाह कर दिया है, जो अधिकांश ग्रामीण आबादी की आजीविका का मुख्य स्रोत है।

संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियां, जैसे कि विश्व खाद्य कार्यक्रम, देश के लाखों लोगों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। हालांकि, इन प्रयासों को धन की कमी और वित्तीय लेन-देन पर लगे प्रतिबंधों के कारण बाधित किया जा रहा है। यूएन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल धन जुटाने और सहायता वितरित करने के लिए विशेष उपाय खोजने का आग्रह किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सख्त जरूरत वाले लोगों तक मदद पहुँच सके।

स्थिति तब और खराब हो जाती है जब सर्दियों का मौसम आता है, क्योंकि ठंड का तापमान और दुर्गम इलाके सहायता वितरण को और भी चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। बच्चों और महिलाओं को इस संकट का सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जहां कुपोषण की दर खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है। यूएन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि स्थिति को शीघ्र नियंत्रित नहीं किया गया तो यह संकट क्षेत्र में और संभावित रूप से वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर विस्थापन और अस्थिरता को जन्म दे सकता है।