शीर्ष अदालत में एसआईआर पर दायर याचिकाओँ पर सुनवाई
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विस्तृत दलीलें सुनी गईं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग मतदाताओं की नागरिकता पर संदेह करने वाले संदिग्ध पड़ोसी या पुलिसकर्मी की भूमिका नहीं निभा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ कई राज्यों में चल रहे एसआईआर अभ्यास की कानूनी वैधता और दायरे पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने चुनाव आयोग के जनादेश के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण की आलोचना की।
उन्होंने तर्क दिया कि आयोग का संवैधानिक दायित्व सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का सुविधाप्रदाता बनना है, न कि मतदाता अधिकारों को प्रतिबंधित करने वाली संस्था। रामचंद्रन ने जोर दिया कि जब नागरिकता को नियंत्रित करने वाली पर्याप्त वैधानिक योजनाएँ मौजूद हैं, तो बूथ-स्तरीय अधिकारी के संदेह के आधार पर नागरिकता की जाँच शुरू करना आयोग को नागरिकता को निलंबित करने की शक्ति प्रदान करता है।
पीठ ने सुनवाई के दौरान प्रवासन की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं पर भी ध्यान दिया। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि श्रमिकों के एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही को अवैध प्रवासी जैसे राजनीतिक रूप से भरे हुए शब्द के बराबर नहीं माना जा सकता। मुख्य न्यायाधीश कांत ने छत्तीसगढ़, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, लक्षद्वीप और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह सहित एसआईआर के लिए 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के चयन के औचित्य पर भी सवाल उठाया। उन्होंने लक्षद्वीप और अंडमान जैसे क्षेत्रों को तेजी से प्रवासन से प्रभावित मानने की धारणा को आलसी अनुमान बताया। सुनवाई 16 दिसंबर को फिर से शुरू होगी।