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कमरे में अलाव जलाकर सोना हो सकता है खतरनाक, जहरीली गैस से घुट सकता है दम

कोरबा: उत्तर भारत समेत छत्तीसगढ़ में भी शीतलहर का प्रकोप शुरू हो गया है. पारा गिरने के साथ ही ठिठुरन जैसे हालात हैं. ठंड से से बचने के लिए लोग गर्माहट की तलाश में अलाव और हीटर का सहारा ले रहे हैं. कोरबा जिले में कोयला आसानी से उपलब्ध हो जाने के कारण, कई परिवार अनजाने में एक जानलेवा गलती कर बैठते हैं. वे बंद कमरों में कोयले की अंगीठी जलाकर गर्मी पाने की कोशिश करते हैं.

कोरबा में पहले भी हो चुकी है मौत

कोरबा जिले में ऐसे कई मामले भी सामने आ चुके हैं, जब बंद कमरे में कोयले की अंगीठी जलाकर सोने वाले लोगों की जान तक जा चुकी है. बंद कमरों में अलाव जलाने से पैदा होने वाली जहरीली गैस जानलेवा हो सकती है.

कार्बन मोनोऑक्साइड बन सकता है मौत का कारण

ईवीपीजी कॉलेज के सहायक प्राध्यापक संदीप शुक्ला कहते हैं कि अलाव जलाकर सोना भारत में सामान्य प्रेक्टिस है. ग्रामीण अंचल में और कोलफील्ड्स जहां कोयला मुफ्त में मिल रहा है, वहां ज्यादा ठंड बढ़ने पर लोग अलाव जलाते हैं या सिगड़ी जलाते हैं या हीटर जलाकर भी सो जाते हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह आत्मघाती कदम है. पहले ऐसे केस भी आए हैं, जिनमें मौतें भी हुईं हैं.

संदीप शुक्ला कहते हैं कि बंद कमरे में जलाए गए अलाव से कार्बन मोनोऑक्साइड नाम की अत्यंत जहरीली गैस का निर्माण होता है. यह गैस रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होती है, जिसके कारण इसका पता लगाना लगभग असंभव होता है.

अलाव या सिगड़ी जलाते हैं तो कार्बन मोनोआक्साइड गैस का स्तर बढ़ जाता है.ऑक्सीजन की कमी होने लगती है. जब कोई व्यक्ति बंद कमरे में यह गैस सांस के जरिए लेता है, तो सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. लंग्स प्रभावित होने लगते हैं. ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है. बहुत लंबे समय तक सोते रहने पर मौत भी हो सकती है. कई बार अर्ली फेस में उल्टी होती है, चक्कर आता है, ऐसा होने पर सिगड़ी या अलाव को बाहर निकाल देना चाहिए और डॉक्टर की भी सलाह ले लेना चाहिए-संदीप शुक्ला, सहायक प्राध्यापक, शासकीय ईवीपीजी कॉलेज, कोरबा

कोयला आसानी से है उपलब्ध

काले हीरों की धरती कहे जाने वाले कोरबा जैसे कोयला उत्पादक क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं पहले कई बार आ चुकी हैं. सिर्फ कोरबा ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी ऐसी दर्दनाक खबरें आती रहती हैं, जहां पूरा का पूरा परिवार सोता ही रह जाता है और सुबह दरवाजा खोलने पर उनकी मृत्यु हो जाती है. ये घटनाएं अक्सर लापरवाही का नहीं बल्कि जानकारी के अभाव का परिणाम भी है.

शीतलहर जैसी बन रही स्थिति

कोरबा जिले में उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं के कारण कड़ाके की ठंड पड़ रही है. ग्रामीण क्षेत्र में ठंड से बचने के लिए लोग सुबह और शाम अलाव का सहारा ले रहे हैं. मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन बदली के बाद न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट आ सकती है. इससे ठंड और बढ़ेगी.