प्रधानमंत्री मोदी खुद विमान टारमैक तक स्वागत के लिए पहुंचे
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता ने दोनों देशों के विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा दी है। यह बैठक वैश्विक दबावों के बीच हुई, जो भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को रेखांकित करती है। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु रक्षा सहयोग रहा, जहाँ पुराने और नए सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में तेजी लाने पर सहमति बनी। भारत रूस से एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म्स की खरीद जारी रखे हुए है, और इस मुलाकात से स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो रही थी।
इसके अतिरिक्त, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया गया। भारत, जो रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार बन गया है, ने दीर्घकालिक तेल और गैस आपूर्ति समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने भारत में रूसी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की प्रगति की समीक्षा भी की। व्यापार और कनेक्टिविटी एक अन्य महत्वपूर्ण विषय था।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर से अधिक तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह कॉरिडोर भारत, ईरान और रूस के बीच माल परिवहन की लागत और समय को कम करने में सहायक होगा।
पुतिन ने यूक्रेन संघर्ष पर भारत के शांति बनाए रखने के रुख की सराहना की, जबकि पीएम मोदी ने एक बार फिर संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीति और संवाद का मार्ग अपनाने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स और एससीओ में वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग जारी रखा जाएगा, जिससे विश्व व्यवस्था में भारत और रूस की संयुक्त आवाज मजबूत हो सके। यह वार्ता दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच संबंध किसी भी वैश्विक समीकरण से प्रभावित हुए बिना, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं।