सरकार के चल रही लंबी वार्ता अंततः टूट गयी
ओटावाः कनाडा की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली एक अभूतपूर्व संकट का सामना कर रही है क्योंकि देश के इतिहास में पहली बार डॉक्टरों के एक बड़े वर्ग ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। यह हड़ताल वेतन, कार्यभार, और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आवश्यक सुधारों की कमी को लेकर सरकार के साथ महीनों से चल रही बातचीत के टूटने के बाद हुई है। इस हड़ताल ने देश भर में हजारों सर्जरी, अपॉइंटमेंट और नियमित चिकित्सा प्रक्रियाओं को प्रभावित किया है, जिससे मरीजों की देखभाल पर गहरा असर पड़ा है।
यह हड़ताल कनाडा के सबसे बड़े चिकित्सा संघों में से एक, कनाडाई मेडिकल एसोसिएशन (सीएमए) के आह्वान पर शुरू हुई है, जिसने कहा है कि डॉक्टरों को पिछले कई वर्षों से वेतन वृद्धि और उचित काम के घंटों के मामले में नजरअंदाज किया गया है। संघ का दावा है कि कोविड 19 महामारी के दौरान फ्रंटलाइन पर काम करने के बावजूद, डॉक्टरों के कार्यभार में लगातार वृद्धि हुई है जबकि सुविधाओं और सहायक कर्मचारियों में कमी आई है। हड़ताल में प्राथमिक देखभाल चिकित्सक, विशेषज्ञ, और निवासी डॉक्टर शामिल हैं।
संघ ने मांग की है कि सरकार न केवल वेतन में उचित वृद्धि करे, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए तत्काल निवेश करे। इसके अलावा, उन्होंने एक ऐसी नीति की मांग की है जो डॉक्टरों को प्रशासनिक बोझ से मुक्त करे ताकि वे मरीजों के इलाज पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को तुरंत पूरा नहीं किया गया, तो कई डॉक्टर कनाडा छोड़कर अन्य देशों में चले जाएंगे, जहाँ बेहतर कामकाजी परिस्थितियाँ और वेतन है, जिससे पहले से ही तनावग्रस्त स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और ध्वस्त हो जाएगी।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने हड़ताल को गहरा निराशाजनक बताया है और डॉक्टरों से तुरंत काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा कर्मचारियों के महत्व को समझती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मांगों को पूरा करने के लिए संघीय बजट पर विचार करना आवश्यक है। कई प्रांतीय स्वास्थ्य मंत्रियों ने संकट को हल करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन संघ ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
इस संकट ने कनाडा के सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा मॉडल के भविष्य पर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। कई आलोचकों का तर्क है कि प्रणाली में धन की कमी है और यह अब जनसंख्या की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इस बीच, हड़ताल के कारण प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को अब और भी लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई लोगों की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो गई है। यह हड़ताल देश की सामाजिक सुरक्षा जाल (Social Safety Net) और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का एक बड़ा परीक्षण है।