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कवर्धा के अस्पताल में छात्रावास की बीमार बच्चियों पर झाड़ फूंक करवाने का आरोप

कवर्धा: रेंगाखार बालिका छात्रावास की तीन छात्राएं स्कूल चलने के दौरान अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी. जिसके बाद बालिका छात्रावास में अफरा तफरी मच गई. हॉस्टल अधीक्षिका और स्टाफ तुरंत बीमार बच्चियों को रेंगाखार सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे.

अस्पताल में इलाज की जगह अंधविश्वास का खेल: लेकिन अस्पताल पहुंचते ही हालात और गंभीर दिखाई दिए, क्योंकि वहां ना ही डॉक्टर मौजूद थे और ना ही पर्याप्त मेडिकल स्टाफ. डॉक्टर के न मिलने पर बच्चियों का उपचार शुरू होने में देरी होती चली गई. इस दौरान अस्पताल परिसर में एक और चौंकाने वाली तस्वीर देखने को मिली. छात्रावास की एक शिक्षिका ने अस्पताल के अंदर ही बैगा को बुलाकर झाड़-फूंक और टोटका शुरू करवा दिया.

अस्पताल में मौजूद कुछ लोगों ने बनाया वीडियो: अस्पताल में मौजूद एक स्थानीय युवक ने ये सब देखकर आपत्ति जताई. टीचर से अस्पताल में इलाज की बजाय अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. इस पर शिक्षिका ने जवाब दिया- ‘दोनों जरूरी हैं’. लोगों का कहना है कि छात्रावास का स्टाफ बच्चियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है, और अस्पताल की बदइंतजामी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया.

वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल: रेंगाखार पूरा वनांचल क्षेत्र है, जहां पहले से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी गंभीर समस्या रही है. डॉक्टरों की अनुपस्थिति, दवाइयों व स्टाफ की कमी का खामियाजा अक्सर ग्रामीणों और छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चों को उठाना पड़ता है. घटना के बाद ग्रामीणों ने इसे लापरवाही का गंभीर मामला बताया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल बच्चियों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.

जानिए क्या कहते हैं अधिकारी: वहीं इस मामले में आदिम जाति कल्याण विभाग के आयुक्त एलपी पटेल ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि छात्रावास के कुछ बच्चियां की कमजोरी के कारण तबियत बिगड़ गई थी. जिन्हें रेंगाखार अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया था. इलाज के बाद सभी बच्चियों को डिस्चार्ज कर दिया गया है. परिजनों को सूचना देकर बुला लिया गया. अस्पताल में झाड़ फूंक की बात पर अधिकारी ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है.