मुकदमों से बचने के लिए वसीयत तैयार करें
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी मामलों को कम करने की दिशा में एक अभूतपूर्व पहल की है। कोर्ट ने उन एकल महिलाओं से एक विशेष अपील की है जिनके बच्चे या पति नहीं हैं, कि वे अपनी संपत्ति और अधिकारों को लेकर भविष्य में होने वाली संभावित कानूनी मुकदमों से बचने के लिए जल्द से जल्द वसीयत तैयार कर लें। कोर्ट का यह निर्देश मायके और ससुरालवालों के बीच संपत्ति विवादों के बढ़ते मामलों को देखते हुए आया है।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जहां एक मृत महिला की संपत्ति को लेकर उसके माता-पिता और पति के परिवार के सदस्यों के बीच लंबा विवाद चल रहा था। कोर्ट ने कहा कि कई बार एकल महिला के निधन के बाद, उनकी संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर दोनों पक्षों में तीखे और लंबे समय तक चलने वाले कानूनी विवाद पैदा हो जाते हैं, जिससे न केवल न्यायपालिका पर बोझ पड़ता है, बल्कि परिवारों को भी भावनात्मक और आर्थिक क्षति होती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति के वितरण की इच्छा को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है। यदि वसीयत मौजूद हो, तो उत्तराधिकार कानून के तहत आने वाले जटिलताओं और रिश्तेदारों के बीच विवादों से बचा जा सकता है। यह अपील विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जो अविवाहित हैं, विधवा हैं, या तलाकशुदा हैं और जिनके बच्चे नहीं हैं।
यह पहल कानूनी जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को अपनी वित्तीय भविष्य की योजना बनाने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि वसीयत बनाना एक साधारण प्रक्रिया है, जो भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचा सकती है। इस अपील को कानूनी विशेषज्ञों द्वारा एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है जो संपत्ति विवादों को सुलझाने के लिए एक सरल और प्रभावी तरीका सुझाता है।