नर्मदापुरम: देशभर में केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं को धरातल पर मूल रूप देने वाली महिलाएं अपनी मांगों को लेकर कड़ाके की ठंड में सोमवार से 24 घंटे के धरना पर बैठी हैं. यह धरना प्रदर्शन पीपल चौक पर आशा-उषा सहयोगी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किया जा रहा है.
आशा-उषा कार्यकर्ताओं की हड़ताल
आशा-उषा सहयोगी संयुक्त मोर्चा की जिला अध्यक्ष बबीता चौबे ने बताया कि “हमारी दो प्रमुख मांगे है. आशा-उषा कार्यकर्ता को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और न्यूनतम वेतन 26 हजार किया जाए. तीन महीने कंप्लीट होकर यह चौथा माह चल रहा है, लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिला है. हमने बड़े-बड़े त्यौहार बिना वेतन के मनाए है. पूरे मध्य प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं को वेतन का भुगतान नहीं हुआ है. अधिकारी हमें गुमराह करते हैं, हम लोगों को कहते हैं कि वेतन विभिन्न कारणों से नहीं आया है. जबकि कारण कुछ भी नहीं है. अधिकारी सिर्फ हमसे काम लेना जानते हैं.”
न्यूनतम वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
उन्होंने आगे बताया कि “हम जब भी वेतन को लेकर मांग रखते हैं, तो नया बहाना बनाते हैं. अभी अधिकारियों का कहना है कोई सॉफ्टवेयर अपडेट हुआ है. जब धरना प्रदर्शन शुरू किए, उसके बाद वेतन डालना शुरू किया गया, पहले से क्यों नहीं किया गया. जबकि सरकार को पता है कि आशा-उषा कार्यकर्ताओं के बिना कोई काम नहीं होता है. आज हमारे यहां LTT केश थे, लेकिन आशाओं ने काम नहीं किया तो एक भी LTT केश नहीं हुआ. इन बातों को अधिकारी मानते हैं, लेकिन बोलने से डरते हैं. फिलहाल यह धरना प्रदर्शन 24 घंटे का है. यदि हमारी सुनवाई नहीं होगी तो आगे और भी प्रदर्शन करेंगे.”
बड़ी मुसीबत से हो रहा परिवार का मेंटेन
एक अन्य आशा-उषा कार्यकर्ता कुंती बकोरिया ने बताया कि “सोमवार सुबह करीब 10 बजे से धरने पर बैठे हैं. हमारी दो मांगे हैं. 26 हजार न्यूनतम वेतन किया जाए और सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए. देर रात तक प्रदर्शन करना हमारा शौक नहीं है. हमारी मजबूरी है. घर पालना हमारी जिम्मेदारी है. हम बड़ी मुसीबत में परिवार को मेंटेन करते हैं.”
आशा-उषा कार्यकर्ताओं की मांग
- आशा एवं पर्यवेक्षकों के वेतन प्रोत्साहन राशि के सभी बकाया राशियों का तुरंत भुगतान किया जाए.
- केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाए गए 1500 रुपए की राशि का एरियर सहित तुरंत भुगतान किया जाए.
- वेतन/प्रोत्साहन राशि का प्रत्येक माह के 5 तारीख तक नियमित रूप से भुगतान सुनिश्चित किए जाएं.
- वेतन/प्रोत्साहन राशि में केंद्र व राज्य के हिस्से का एक साथ और नियमित भुगतान के लिए ठोस प्रशासनिक व्यवस्था की जाए.
- आशा एवं पर्यवेक्षकों को किये जाने वाले वेतन भुगतान का पर्ची दिया जाए.
- प्रदेश के आशाओं का रोका गया टीम बेस्ड इंसेंटिव का तुरंत भुगतान किया जाए और आशा पर्यवेक्षकों को भी इसमें शामिल किया जाए.
- आशा-उषा कार्यकर्ता व आशा पर्यवेक्षकों की बीएलओ की ड्यूटी निरस्त की जाए और निर्वाचन संबंधी कार्यों से उन्हें अलग रखा जाए.