चुनावी सीजन में हर किसी को हर किसी की याद आ ही जाती है। खास कर वोटों की इच्छा रखने वालों को तो हर मतदाता में भगवान ही नजर आता है। बिहार की जटिल राजनीति में इसका प्रभाव तनिक ज्यादा ही दिखता है। अब इसका क्या करें कि बेचारे उप मुख्यमंत्री को अपने ही इलाके में भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
नेताजी की नाराजगी इतनी थी कि वह पुलिस और प्रशासन तक पर अनाप शनाप बोलने लगे। गनीमत है कि घटना का वीडियो मौजूद था वरना सही में यह मान लिया जाता कि विजय सिन्हा पर जानलेवा हमला किया गया था। दिख रहा था कि नाराज लोगों ने सड़क की मांग पर विरोध किया और धमकाने पर डिप्टी सीएम की गाड़ी पर गोबर भी फेंक दिया।
लेकिन इस एक घटना से यह संकेत भी मिल जाता है कि प्रशासन भी बीच का रास्ता पकड़कर चल रहा है। अइसा तब होता है जब प्रशासनिक अधिकारियों को यह लगने लगे कि चांस दोनों तरफ का बना है। इसलिए किसी को नाराज नहीं करना चाहते। तो क्या वाकई बिहार में बदलाव भी हो सकता है, के सवाल पर अभी बहस जारी रखी जा सकती है क्योंकि चुनाव परिणाम आने में कुछ दिन बाकी है। तब तक बातों की जुगाली करने से कोई किसी को रोक नहीं सकता।
बेचारे ज्ञानेश कुमार दो पाटों के बीच कुछ ऐसा पिस रहे हैं कि उन्हें रिटायर होने के बाद भी सबक सीखाने की धमकी दी जा रही है। यह धमकी किसी और ने नहीं बल्कि कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने दी है। यूं तो सरकार बदलने की स्थिति में पूर्व सरकार के चहेतों का अंधकार में चला जाना एक स्वाभाविक बात है पर यहां तो सजा देने का एलान खुद राहुल गांधी भी पहले ही कर चुके हैं। गनीमत है कि विरोधी दल अभी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को याद नहीं कर रहे हैं। लेकिन सवाल जस का तस खड़ा है कि आखिर राजीव कुमार कहां हैं और जनता की नजरों से ओझल क्यों हैं।
एक बात बार बार मेरी जेहन में आता है कि अगर सरकार बदली तो मुख्य धारा के टीवी चैनलों के प्रमुख एंकरों का भविष्य क्या होगा। कंपनी का मालिक को तुरंत ही तेवर बदल लेगा लेकिन मोदी भक्ति में जिनलोगों ने खुद का रिकार्ड बना लिया है, वे आने वाले दिनों में इसी पेशा में रहेंगे अथवा गुमनामी में खो जाएंगे, यह सवाल भी बड़ा है।
इसी बात पर फिल्म पगला कहीं का, का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था हसरत जयपुरी ने और संगीत में ढाला था शंकर जयकिशन ने। इसे मोहम्मद रफी ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं
तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ …
वो बहारें वो चांदनी रातें
हमने की थी जो प्यार की बातें
वो बहारें वो चांदनी रातें
हमने की थी जो प्यार की बातें
उन नज़ारों की याद आएगी
जब खयालों में मुझको लाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ …
मेरे हाथों में तेरा चेहरा था
जैसे कोई गुलाब होता है
मेरे हाथों में तेरा चेहरा था
जैसे कोई गुलाब होता है
और सहारा लिया था बाहों का
वो शाम किस तरह भुलाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ …
मुझको देखे बिना क़रार ना था
एक ऐसा भी दौर गुज़रा है
मुझको देखे बिना क़रार ना था
एक ऐसा भी दौर गुज़रा है
झूठ मानूँ तो पूछलो दिल से
मैं कहूंगा तो रूठ जाओगे
हाँ तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
चलिए अब चलते चलते झारखंड की भी बात कर लें। जैसा सोचा गया था वइसा ही हुआ। अनुराग गुप्ता हटा दिये गये। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह अच्छा फैसला रहा क्योंकि जिस पर उन्होंने बहुत भरोसा किया, वैसे दो लोग खुद को ही सत्ता का केंद्र समझने की गलती कर बैठे थे।
लेकिन मसला शायद यही खत्म नहीं होगा क्योंकि एसीबी में कई फाइलों के गुम होने की चर्चा बहुत है। वे कौन सी फाइलें हैं और उसमें क्या दर्ज है, इस पर सिर्फ अटकलबाजी संभव है। फिर भी यह आगे कोई बड़ा गुल नहीं खिलायेगी, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। घाटशिला का चुनाव निपट जाने के बाद सरकार में भी क्या कुछ होता है, उसपर सभी का ध्यान है पर इसी वजह से लोग यह फिर से गुनगुना रहे हैं कि तुम मुझे यूं भूला ना पाओगे।