पंजाब के राज्यपाल ने अभियोजना स्वीकृति पर हस्ताक्षर किये
-
सात सौ करोड़ की संपत्ति का आरोप
-
ड्रग तस्करी से जुड़ने की चर्चा भी है
-
25 जून को गिरफ्तार किया गया था
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने पूर्व शिरोमणि अकाली दल के मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस ब्यूरो) द्वारा दर्ज किए गए भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत यह मंजूरी, 8 सितंबर को पंजाब मंत्रिमंडल द्वारा की गई सिफारिश के बाद दी गई है। मामले में मजीठिया पर यह आरोप है कि उन्होंने 700 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी घोषित आय के अनुपात में लगभग 1,200 फीसद अधिक है। यह संपत्ति कथित तौर पर 2013 के मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से जुड़े 540 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के माध्यम से प्राप्त की गई। सरकारी सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है।
मजीठा से तीन बार के विधायक, बिक्रम सिंह मजीठिया को 25 जून को उनके अमृतसर स्थित आवास और 25 अन्य स्थानों पर तड़के मारे गए छापों के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई के दौरान सतर्कता ब्यूरो ने डिजिटल उपकरण, संपत्ति दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए थे। 26 जून को मोहाली की एक अदालत ने उन्हें सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा था, जिसे बाद में चार दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया। 6 जुलाई को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
ब्यूरो ने 22 अगस्त को एक विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया था, जो 40,000 से अधिक पृष्ठों के साक्ष्यों और 200 से अधिक गवाहों के बयानों पर आधारित था। यह जांच 2013 के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस जांच से शुरू हुई थी जो पूर्व डीएसपी जगदीश सिंह भोला के नेतृत्व वाले 6,000 करोड़ रुपये के सिंथेटिक ड्रग रैकेट से संबंधित थी।
आरोप है कि भोला ने पूछताछ के दौरान मजीठिया का नाम लिया था। हालाँकि, अदालतें पहले ड्रग-संबंधी आरोपों को खारिज कर चुकी थीं, लेकिन वर्तमान मामला भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग पर केंद्रित है। मजीठिया ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया है।
अगस्त में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी, हालाँकि उन्होंने सितंबर में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत हासिल कर ली थी। अब यह मुकदमा मोहाली सत्र न्यायालय में आगे बढ़ेगा। राज्यपाल की मंजूरी से अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।