Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
असम की महिलाओं की 'बड़ी बैसाखी'! 40 लाख लाभार्थियों के खाते में आएंगे ₹9,000; CM हिमंत सरमा ने महिला... दिल्ली के नाम ऐतिहासिक रिकॉर्ड! बनी देश की पहली 'रिंग मेट्रो' वाली राजधानी, पीएम मोदी ने 71.5 किमी ल... Punjab Budget 2026: 'मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना' शुरू, महिलाओं को मिलेंगे ₹1000 और SC महिल... Arvind Kejriwal in Gujarat: गांधीनगर में अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान, बोले- "भ्रष्टाचार खत्म करने क... Kanpur News: कानपुर में फॉरेंसिक साइंटिस्ट की सरेआम पिटाई, तीन महिलाओं ने बीच चौराहे पर किया हमला; प... UP News: उत्तर प्रदेश में गूगल मैप की बड़ी लापरवाही, गलत नेविगेशन के कारण नाले में गिरी तेज रफ्तार क... दिल्ली की रफ्तार को लगा 'पंख'! सीएम रेखा ने किया नए मेट्रो कॉरिडोर का उद्घाटन; कनेक्टिविटी में आएगा ... Tamil Nadu Assembly Election 2026: AIADMK चीफ पलानीस्वामी ने DMK-कांग्रेस गठबंधन को घेरा, बोले- "गठब... Karnataka Crime News: शादी के नाम पर जबरन धर्म परिवर्तन और लूट! कर्नाटक की महिला ने पति पर लगाए गंभी... मलेरिया नियंत्रण की दिशा में इस खोज की बहुत मदद मिलेगी

Instagram का नया AI टूल: Reels और Stories की एडिटिंग हुई बेहद आसान, अब चुटकियों में बदलें बैकग्राउंड और कलर

आज से लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा शुरू हो चुकी है. ये महापर्व चार दिनों का होता है. आज नहाय-खाय है. कल खरना होगा. परसो अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसके बाद 28 अक्टूबर को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा संपन्न हो जाएगी. इस महापर्व में 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है. इस पर्व का भारत के कई राज्यों में विशेष महत्व है. इसमें बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश शामिल है. छठ के मौके पर भगवान सूर्य और छठी मैया पूजी जाती है.

छठ पूजा में उपायोग होने वाला हर एक वस्त्र, बर्तन और सामग्री विशेष महत्व रखती है. इन्हीं में शामिल है सूप या सुपा. सुपा छठ पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, लेकिन लोगों के मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि छठ पूजा में पीतल का सुपा उपयोग करना सही और शुभ रहता है या बांस के सुपा का. आइए इस बारे में जानते हैं.

बांस का सुपा

छठ पूजा का व्रत संतान की वृद्धि, सफलता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है. छठ पूजा में बांस का सुपा पौराणिक समय से ही उपायोग किया जा रहा है. बांस का सुपा पूरी तरह प्राकृतिक और सात्विक माना जाता है. मान्यता है कि जैसे आठ सप्ताह में बांस की 60 फीट ऊंचाई तेजी से बढ़ती है, वैसे ही इस बांस के सूप में व्रत की पूजा करने से संतान को जीवन में सफलता तेजी से मिलती है. बांस के सुपा में ठेकुआ, फल, और अन्य प्रसाद सजाकर अर्घ्य दिया जाता है, जिसे प्रकृति और सूर्य देव के प्रति श्रद्धा को शुद्धतम रूप में व्यक्त करना माना जाता है.

पीतल का सुपा

आधुनिक समय में छठ के व्रत के अनुष्ठान में पीतल के सूप, परात और पूजा के कलश का उपयोग भी देखा जाने लगा है. शास्त्रों में बताया गया है कि पीली चीजें सूर्य भगवान का प्रतीक हैं. पीतल या फुल्हा बर्तन भी पीला होता है. छठ व्रत में भगवान सूर्य को पीतल के सुपा में भी अर्घ्य दिया जा सकता है.

कौनसा सुपा है सही और शुभ?

दोनों ही सूप का अपना-अपना महत्व है. बांस का सुपा प्रकृति, परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक बताया जाता है, तो पीतल का सुपा वैभव और समृद्धि का प्रतीक है. परंपरागत रीति से पूजा करने के लिए बांस का सुपा शुभ और सही रहता है. वहीं पूजा में शुद्धता के साथ आधुनिकता को भी शामिल करना हो तो पीतल का सुपा शुभ रहता है.