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आतंकवादी हमले से सरकार अब निशाने पर

पाकिस्तान में राजनीतिक उठापटक का माहौल गरमाया

इस्लामाबादः पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति और आतंरिक राजनीति में आया उबाल हाल की सबसे महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय खबरों में से एक है। सुरक्षा मोर्चे पर, देश एक बार फिर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे आतंकवादी समूहों के बड़े और समन्वित हमलों का सामना कर रहा है।

ख़बरों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक घातक हमले में पाकिस्तानी सेना के 11 सैनिकों (जिनमें कर्नल और मेजर जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे) की मौत हो गई। यह हमला दर्शाता है कि पाकिस्तान में टीटीपी की गतिविधियाँ और उसकी मारक क्षमता एक बार फिर बढ़ गई है।

यह समूह पाकिस्तान सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है, खासकर जब से अफगानिस्तान में तालिबान ने सत्ता संभाली है, जिसके कारण टीटीपी को एक सुरक्षित पनाहगाह और प्रोत्साहन मिला है। इन हमलों का मकसद न केवल सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना है, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी डर और अनिश्चितता पैदा करना है।

इसके साथ ही, बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी समूह बलूच आर्मी द्वारा जाफर एक्सप्रेस को निशाना बनाने का हमला भी चिंताजनक है। बलूच विद्रोही समूह लम्बे समय से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और पाकिस्तानी सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।

इस तरह के हमले देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए दोहरी चुनौती पेश करते हैं—एक तरफ धार्मिक कट्टरपंथी समूह और दूसरी तरफ जातीय अलगाववादी समूह (बलूच)। इन बढ़ते हमलों को रोकने में पाकिस्तानी सेना की विफलता, या कम से कम संघर्ष, देश की रक्षा तैयारियों और खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े करती है। विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान की सीमा पार से भी समर्थन मिल रहा है, जिससे समस्या और भी जटिल हो गई है।

राजनीतिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान में अस्थिरता बनी हुई है। देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के बीच सत्ता और प्रभाव को लेकर गहरा मतभेद सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज और उनके चाचा शहबाज शरीफ की सरकार के बीच की खींचतान सार्वजनिक हो गई है।

यह राजनीतिक कलह देश के आर्थिक संकट को और गहरा कर सकती है। आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे संगठनों से राहत पैकेज पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में, राजनीतिक एकता की कमी और सुरक्षा संकट देश के लिए एक विनाशकारी कॉकटेल बन सकता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ बढ़ गई हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की चुनौतियाँ भी बढ़ गई हैं, क्योंकि उन्हें एक तरफ सैन्य हमलों का जवाब देना है और दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ने से रोकना है।