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तटीय कटाव से पूरा गांव खतरे में आया

इरसामा ब्लॉक इलाके में समुद्र का तेजी से आगे बढ़ना जारी

  • आधा किलोमीटर तक अंदर आया समुद्र

  • अचानक ही तेज हो गयी इसकी गति

  • वहां बना वॉचटावर भी समुद्र में

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वरः  ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में स्थित इरसामा ब्लॉक के तटीय गाँव इन दिनों भयावह तटीय कटाव का सामना कर रहे हैं। बुधवार को रामतारा गाँव के पास समुद्र की लहरें इतनी तेज हो गईं कि उन्होंने तटरेखा को तोड़ दिया और समुद्र का पानी कई किलोमीटर तक अंदरूनी इलाकों में घुस गया। इस अप्रत्याशित घटना ने स्थानीय ग्रामीणों में दहशत फैला दी है और उन्हें अपने घरों और जीवन की सुरक्षा के लिए ऊंचे स्थानों पर पलायन करने को मजबूर कर दिया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे समुद्र का खारा पानी तेजी से गाँव में घुस रहा है। इस कटाव से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हो रहा है। खेतों में खारा पानी भरने से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। इस घटना ने अचानक पूरे इलाके के पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ दिया है।

इरसामा में इस तरह के बड़े पैमाने पर तटीय कटाव की घटना ने समुद्री किनारे रहने वाले ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है। समुद्र का पानी लगभग आधा किलोमीटर जमीन को निगल चुका है, और इसी क्रम में पर्यटन विभाग द्वारा बनाया गया एक वॉचटावर भी समुद्र में समा गया है।

यह तटीय कटाव कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन इसकी तीव्रता ने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। पिछले कुछ दिनों से समुद्र में लगातार उथल-पुथल दिख रही है और तट के पास असामान्य रूप से बड़ी लहरें देखी जा रही हैं। रामतारा तट के पास समुद्र के घुसने के बाद से, रामतारा, पद्मपुर, गढ़ हरीशपुर, सरवंत और काला बेदी जैसे कई गाँव पहले ही समुद्र में डूब चुके हैं। ये गाँव अब इतिहास बनने के कगार पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ओडिशा सरकार ने इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया और कोई ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में ये सभी गाँव नक्शे से गायब हो जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते स्तर और तटीय क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप के कारण इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर तटीय कटाव को रोकने के लिए तत्काल उपाय नहीं किए गए, जैसे कि तटबंधों का निर्माण और मैंग्रोव वनों का संरक्षण, तो भविष्य में और भी अधिक तबाही देखने को मिल सकती है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए कदम उठाए और विस्थापित हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाकर उनकी मदद करे। यह घटना ओडिशा के तटीय इलाकों के लिए एक बड़ा खतरे का संकेत है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।