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रोबोट पक्षी बिना जीपीएस या रोशनी के उड़ता है

पक्षियों की नकल कर रोबोटिक्स ने नई उपलब्धि पायी

  • पैंतालिस किलोमीटर की रफ्तार है इसकी

  • रास्ते के अवरोधों को खुद पहचान सकता है

  • हल्के 3 डी लिडार सेंसर का प्रयोग करता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हांगकांग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर फू झांग की टीम ने बनाया नया रोबोटिक ड्रोन जो पक्षियों की तरह उड़ सकता है। 💡 इस ड्रोन का नाम है- सेफ्टी-अश्योर्ड हाई-स्पीड एरियल रोबोट (सुपर)। यह बिना किसी बाहरी मदद के घने जंगलों में भी तेज़ी से उड़ान भर सकता है। जहाँ सामान्य ड्रोन को रास्ता दिखाने या पहले से तय किए गए रास्ते पर चलने की ज़रूरत होती है, वहीं सुपर अपने सेंसर और कंप्यूटिंग शक्ति के दम पर खुद ही रास्ता खोज लेता है।

यह छोटा सा ड्रोन 20 मीटर प्रति सेकंड (लगभग 45 मील प्रति घंटे) से भी ज़्यादा की रफ्तार से उड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि यह 2.5 मिलीमीटर जितनी पतली बाधाओं, जैसे बिजली के तार या टहनियों, को भी आसानी से पहचान कर उनसे बच सकता है। सिर्फ 280 मिमी के व्हीलबेस और 1.5 किलोग्राम के वज़न वाला यह ड्रोन रात में भी घने जंगलों में नेविगेट कर सकता है।

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प्रोफेसर झांग इस आविष्कार को ड्रोन तकनीक में एक बड़ी क्रांति मानते हैं। वे कहते हैं, कल्पना कीजिए कि एक रोबोट पक्षी तेज़ी से जंगल में घूम रहा है, जो शाखाओं और बाधाओं से बच रहा है। यह स्वायत्त उड़ान तकनीक में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा सिस्टम माइक्रो एयर व्हीकल्स को उच्च गति पर जटिल वातावरण में नेविगेट करने की अनुमति देता है, जिसमें पहले कभी इतनी सुरक्षा नहीं थी। यह ड्रोन को एक पक्षी की तरह सजगता देता है, जिससे यह अपने लक्ष्य की ओर दौड़ते हुए वास्तविक समय में बाधाओं को दूर कर सकता है।

सुपर की सफलता उसके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के शानदार इंटीग्रेशन में छिपी है। यह एक हल्के 3 डी लिडार सेंसर का उपयोग करता है, जो 70 मीटर दूर तक की बाधाओं का पता लगा सकता है। यह सेंसर, एक एडवांस प्लानिंग सॉफ्टवेयर के साथ मिलकर काम करता है। सॉफ्टवेयर दो तरह के रास्ते बनाता है। पहले यह रास्ता गति को प्राथमिकता देता है और उन जगहों में जाने की कोशिश करता है जहाँ पहले से कोई जानकारी नहीं है। दूसरे यह रास्ता सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और उन क्षेत्रों में रहता है जहाँ कोई बाधा नहीं है।

यह सिस्टम लिडार डेटा को सीधे पॉइंट क्लाउड के रूप में प्रोसेस करता है, जिससे कंप्यूटेशन का समय बहुत कम हो जाता है। यही कारण है कि यह इतनी तेज़ी से फ़ैसले ले पाता है। इस तकनीक को कई जगहों पर टेस्ट किया गया है, जैसे- पुराने स्थलों की स्वायत्त खोज। इसने इनडोर और आउटडोर, दोनों ही वातावरणों में शानदार प्रदर्शन किया है।

इस तकनीक से कई क्षेत्रों में नए दरवाज़े खुल सकते हैं। इसका उपयोग स्वायत्त डिलीवरी, पावर लाइन निरीक्षण, वन निगरानी, और मैपिंग में किया जा सकता है।

खोज और बचाव अभियानों में, यह ड्रोन ढही हुई इमारतों या घने जंगलों में दिन-रात तेज़ी से जाकर बचे हुए लोगों को ढूँढ सकता है। यह मौजूदा ड्रोन की तुलना में बहुत ज़्यादा कुशल है। यह दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में ज़रूरी चीज़ें भी पहुँचा सकता है। अनुसंधान पत्र के प्रमुख लेखक, श्री युनफ़ान रेन के अनुसार, पतली बाधाओं से बचने और तंग जगहों पर जाने की क्षमता से खोज और बचाव जैसे अनुप्रयोगों के लिए नई संभावनाएँ खुलती हैं, जहाँ हर सेकंड मायने रखता है। रात सहित विभिन्न प्रकाश स्थितियों में सुपर की मज़बूती इसे चौबीसों घंटे के संचालन के लिए एक विश्वसनीय उपकरण बनाती है।

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