अमेजन की रेत मक्खियों में मिला नया वैक्टीरिया
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बार्टोनेला नामक बैक्टीरिया की खोज की गयी
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कैरियोन रोग के वाहन बनते हैं यह
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इसकी जानकारी पहले बिल्कुल नहीं थी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः अमेजन नेशनल पार्क, ब्राज़ील के परा राज्य में, वैज्ञानिकों ने फ्लेबोटोमाइन नामक एक खास प्रकार की रेत मक्खी में बार्टोनेला नामक बैक्टीरिया की एक नई प्रजाति का पता लगाया है। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बार्टोनेला जीनस के बैक्टीरिया कई तरह के रोगों का कारण बनते हैं।
हालांकि, अभी तक इस नई प्रजाति के इंसानों में बीमारी फैलाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इसके डीएनए की संरचना बार्टोनेला बैसिलिफोर्मिस और बार्टोनेला एन्काशेंसिस नामक दो अन्य बैक्टीरिया से काफी मिलती-जुलती है। ये दोनों प्रजातियाँ कैरियोन रोग नामक एक गंभीर बीमारी का कारण बनती हैं, जो रेत मक्खियों द्वारा ही फैलती है।
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कैरियोन रोग, जिसे पेरूवियन वार्ट या ओरोया बुखार के नाम से भी जाना जाता है, एक गंभीर संक्रामक बीमारी है जो बार्टोनेला बैसिलिफोर्मिस नामक बैक्टीरिया से होती है। यह रोग मुख्य रूप से एंडीज पर्वतमाला के क्षेत्रों में पाया जाता है और फ्लेबोटोमाइन रेत मक्खियों के काटने से फैलता है। इस बीमारी के दो चरण होते हैं।
यह बीमारी का शुरुआती और तीव्र चरण है, जिसमें रोगी को तेज़ बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गंभीर एनीमिया हो सकता है। यदि इसका इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकता है। पेरूवियन वार्ट में बीमारी का दूसरा और पुराना चरण है, जिसमें त्वचा पर लाल या बैंगनी रंग के मस्से जैसे घाव (warts) दिखाई देते हैं। ये घाव आमतौर पर महीनों तक बने रहते हैं और फिर धीरे-धीरे ठीक होते हैं।
कैरियोन रोग की खोज और नामकरण डैनियल अल्सीड्स कैरियोन के नाम पर हुआ है, जो पेरू के एक मेडिकल छात्र थे। उन्होंने इस बीमारी की प्रकृति को समझने के लिए खुद को संक्रमित कर लिया था और इसी प्रयोग में उनकी मृत्यु हो गई थी।
यह शोध साओ पाउलो स्टेट यूनिवर्सिटी के मार्कोस रोजेरियो आंद्रे और साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के यूनिस अपारेसिडा बियांची गालाती द्वारा किया गया था। शोधकर्ताओं ने अमेजन नेशनल पार्क में फरवरी 2022 से फरवरी 2023 के बीच कुल 297 मादा रेत मक्खियों के नमूनों का अध्ययन किया। उनका उद्देश्य इन मक्खियों में बार्टोनेला बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाना था।
इस नई खोज से यह संकेत मिलता है कि कैरियोन रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया अपनी भौगोलिक सीमा से बाहर भी फैल सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, पेरू में पाए जाने वाले रोगवाहक रेत मक्खियों की प्रजातियाँ ब्राज़ील में पाए जाने वाली रेत मक्खियों की प्रजातियों से काफी मिलती-जुलती हैं, जिससे इस बैक्टीरिया के अनुकूलन और प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
यह शोध दर्शाता है कि दुनिया के अलग-थलग और कम विकसित क्षेत्रों में बार्टोनेलोसिस जैसे उपेक्षित रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना कितना महत्वपूर्ण है, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच सीमित है।
इस नई खोज के बाद, वैज्ञानिकों ने अन्य क्षेत्रों में भी रेत मक्खियों और उनमें पाए जाने वाले बैक्टीरिया का अध्ययन करने की योजना बनाई है। उनका अगला कदम यह पता लगाना है कि ये रेत मक्खियां किन जानवरों को काटती हैं, ताकि रोग के भंडार का पता लगाया जा सके।
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