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31/एटलस: हमारे सौर मंडल का तीसरा अंतरतारकीय मेहमान

खगोल दूरबीनों की वजह से नये पिंडों का पहले पता चल जाता है

  • बाहरी दुनिया से इधर चले आये हैं

  • इसकी गति दूसरों से काफी अधिक है

  • इसकी उम्र अरबों वर्षों की आंकी गयी है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हाल ही में, खगोलविदों की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने हमारे सौर मंडल में तीसरे ज्ञात अंतरतारकीय वस्तु की खोज की है, जिसे 31/एटलस नाम दिया गया है। मिशिगन विश्वविद्यालय के एक डॉक्टोरल छात्र, एस्टर टेलर सहित कई शोधकर्ताओं ने इस पर एक नया अध्ययन प्रकाशित किया है, जो इस दूरस्थ खगोलीय पिंड की विशेषताओं को उजागर करता है।

अंतरतारकीय वस्तुएं वे पिंड हैं जो हमारे सौर मंडल के बाहर पैदा होते हैं और सूर्य के चारों ओर एक स्थिर कक्षा में आए बिना ही इससे गुजरते हैं। 31/एटलस और इसके दो पूर्ववर्ती, ओउमुआमुआ और बोरिसोव ने वैज्ञानिकों को हमारी आकाशगंगा के सुदूर हिस्सों के बारे में जानने के लिए दुर्लभ और मूल्यवान अवसर प्रदान किए हैं।

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31/एटलस अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में तेज, बड़ा और पुराना है। इसकी हाइपरबोलिक गति लगभग 60 किलोमीटर प्रति सेकंड (लगभग 1,30,000 मील प्रति घंटा) है, जो ओउमुआमुआ की 26 और बोरिसोव की 32 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से काफी अधिक है।

प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, 31/एटलस का व्यास 10 किलोमीटर तक हो सकता है, जो ओउमुआमुआ से 100 गुना और बोरिसोव से 10 गुना बड़ा है। हालांकि, टेलर का मानना है कि बेहतर अवलोकन के साथ ये संख्याएँ कम हो सकती हैं।

ओउमुआमुआ और बोरिसोव की आयु लाखों वर्षों में मापी गई थी, जबकि 31/एटलस की अनुमानित आयु 3 अरब से 11 अरब वर्ष के बीच है। यह इसे हमारी आकाशगंगा जितना ही पुराना बनाता है और शुरुआती ब्रह्मांड में तारों और ग्रहों के निर्माण के बारे में महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है।

संभावित संरचना और अवलोकन

एस्टर टेलर के अनुसार, 31/एटलस संभवतः एक धूमकेतु है। यह गैस और धूल के एक बादल, जिसे कोमा कहते हैं, से घिरा हुआ है। जैसे-जैसे यह सूर्य के पास आएगा, इसका कोमा और विकसित होगा, जिससे इसकी संरचना के बारे में दिलचस्प जानकारी मिलेगी।

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के पोस्टडॉक्टोरल फेलो डैरिल सेलिगमैन ने बताया कि इसमें संभवतः बर्फ मौजूद है, जो सूर्य के पास आने पर सक्रिय हो सकती है। हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप जैसे शक्तिशाली दूरबीनें आने वाले महीनों में 31/एटलस को करीब से देख पाएंगी, जिससे इसके आकार, घूर्णन और सूर्य के संपर्क में आने पर इसकी प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जा सकेगा।

इस खोज में नासा के एक्सट्रा टेरेटेरियल इंपैक्ट लास्ट एलर्ट सिस्टम( एटएलएएस) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस यंत्र में चार दूरबीनें शामिल हैं जो हर रात पूरे आकाश को स्कैन करती हैं। जब 31/एटलस की खोज हुई, तो टीम के पास समय बहुत कम था क्योंकि वे चाहते थे कि खबर सबसे पहले वे ही प्रकाशित करें। एस्टर टेलर ने बताया कि जब उन्हें इसकी खबर मिली, तब वह छुट्टी पर थे और उन्हें अपने अगले दो दिन इस काम में लगाने पड़े।

यह खोज रोमांचक होने के साथ-साथ तनावपूर्ण भी थी। सेलिगमैन ने कहा कि यह खबर उनके सहयोगियों ने उन्हें आधी रात में भेजी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत सभी खगोलविदों से अपने दूरबीनों को इस ओर मोड़ने का आग्रह किया। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वेरा सी. रुबिन वेधशाला जैसी नई तकनीकें हर साल एक या दो नए अंतरतारकीय पिंडों की खोज करने में मदद करेंगी। अब तक केवल तीन ही खोजे गए हैं, लेकिन शोधकर्ता 10 या उससे अधिक का नमूना मिलने पर बेहद उत्साहित होंगे, क्योंकि इससे इन रहस्यमयी वस्तुओं के बारे में हमारी समझ और भी गहरी होगी।