सत्तर मिलियन वर्ष पुराना अवशेष अर्जेंटीना में मिला
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कोस्टेनसूचुस एट्रोस इसका नाम रखा गया है
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जीवाश्म चोरिल्लो फॉर्मेशन से मिला है
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इसके जबड़े और दांत बहुत मजबूत थे
राष्ट्रीय खबर
रांचीः जैसे जैसे विज्ञान आगे बढ़ रहा है, हमारी जानकारियों भी विस्तार पा रही हैं। इसके आधार पर अब यह कहा जा सकता है कि प्राचीन पृथ्वी पर जो भी जीव रहते थे, उनके बारे में हमें अब तक पूरी जानकारी नहीं मिल पायी है। नये नये शोध से उनके बारे में पता चल रहा है।
हाल ही में अर्जेंटीना में 70 मिलियन वर्ष पुराने एक मगरमच्छ के रिश्तेदार के जीवाश्म की खोज की गई है, जिसकी पहचान कोस्टेनसूचुस एट्रोस (Kostensuchus atrox) के रूप में हुई है। यह प्रजाति डायनासोर को कुचलने वाले जबड़ों के लिए जानी जाती है।
यह खोज अर्जेंटीना के म्यूसियो अर्जेंटीनो डे सिएनसियास नैचुरल्स बर्नार्डिनो रिवाडाविया के फर्नांडो नोवास और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए एक अध्ययन का हिस्सा है, जिसे 27 अगस्त 2025 को पीएलओएस वन नामक ओपन-एक्सेस जर्नल में प्रकाशित किया गया था।
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जीवाश्म चोरिल्लो फॉर्मेशन नामक स्थान से मिला है, जिसका निर्माण लगभग 70 मिलियन वर्ष पहले क्रेटेशियस काल के अंत में मास्ट्रिच्टियन युग के दौरान हुआ था। उस समय दक्षिणी पैटागोनिया एक गर्म और नम वातावरण वाला क्षेत्र था, जिसमें ताजे पानी के मैदान थे। यह जगह डायनासोर, कछुए, मेंढक और विभिन्न स्तनधारियों जैसे जीवों का घर थी। यह खोज इस प्राचीन पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर समझ के लिए महत्वपूर्ण है।
इस नए जीवाश्म की खासियत यह है कि यह असाधारण रूप से अच्छी तरह से संरक्षित है। इसमें खोपड़ी और जबड़ों के साथ-साथ शरीर की कई हड्डियाँ भी शामिल हैं, जिनमें विस्तृत जानकारी देखी जा सकती है। इस विलुप्त प्रजाति की लंबाई लगभग 3.5 मीटर (11.5 फीट) और वजन लगभग 250 किलोग्राम (551 पाउंड) होने का अनुमान है। इसका चौड़ा, शक्तिशाली जबड़ा और बड़े दाँत इसे बड़े शिकार, संभवतः मध्यम आकार के डायनासोर, को भी खा सकने में सक्षम बनाते थे।
शोधकर्ताओं ने इस प्रजाति का नाम कोस्टेन्सुचुस एट्रॉक्स रखा है। कोस्टेन नाम तेहुएल्चे की मूल भाषा में पैटागोनिया की हवा को संदर्भित करता है, जबकि सूचोस मिस्र के मगरमच्छ-सिर वाले देवता का नाम है। एट्रॉक्स का अर्थ भयंकर या कठोर है। यह नाम इस शिकारी की शक्ति और उसके भौगोलिक उत्पत्ति दोनों को दर्शाता है।
इस प्रजाति का वर्गीकरण भी किया गया है। यह एक डायनासोर नहीं है, बल्कि यह पीरोसौरिड क्रोकोडिलिफॉर्म नामक एक विलुप्त सरीसृप समूह से संबंधित है, जो आधुनिक मगरमच्छों और घड़ियालों का रिश्तेदार है। यह मास्ट्रिच्टियन चोरिल्लो फॉर्मेशन से वैज्ञानिकों को ज्ञात दूसरा सबसे बड़ा शिकारी है और संभवतः इस क्षेत्र के शीर्ष शिकारियों में से एक था।
यह जीवाश्म चोरिल्लो फॉर्मेशन में पाया गया पहला क्रोकोडिलिफॉर्म जीवाश्म भी है और अब तक मिले सबसे अधिक अक्षुण्ण पीरोसौरिड क्रोकोडिलिफॉर्म जीवाश्मों में से एक है। इसकी उत्कृष्ट स्थिति वैज्ञानिकों को इन प्रागैतिहासिक जानवरों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में अनूठी और नई जानकारी प्रदान करती है। यह खोज हमें यह समझने में मदद करती है कि लाखों साल पहले पृथ्वी पर जीवन कैसा था और कैसे विभिन्न प्रजातियां एक-दूसरे के साथ सह-अस्तित्व में थीं।