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तुर्किए के बाद अब अजरबैजान भी कीमत चुका रहा है

भारतीय पर्यटक नहीं जा रहे अब वहां घूमने

बाकूः भारतीय पर्यटकों ने तुर्की के बाद अब अज़रबैजान से भी मुँह मोड़ लिया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का साथ देने के कारण अज़रबैजान को अपने पर्यटन उद्योग में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस साल की शुरुआत में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद से ही भारतीय पर्यटकों ने अज़रबैजान की अपनी यात्रा की बुकिंग और योजनाएं रद्द कर दी हैं, जिससे वहाँ के पर्यटन को बड़ा झटका लगा है।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, जून 2025 में अज़रबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 66 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में दो-तिहाई से भी अधिक है। जून महीने में जहाँ पिछले साल 28,315 भारतीय पर्यटक अज़रबैजान गए थे, वहीं इस साल यह संख्या घटकर मात्र 9,934 रह गई है। यह आँकड़ा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारतीय पर्यटकों के मन में अज़रबैजान के प्रति नाराजगी कितनी गहरी है।

मई और जून के महीने भारतीय पर्यटकों के लिए अज़रबैजान की यात्रा के सबसे पसंदीदा महीने माने जाते हैं, लेकिन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर अज़रबैजान के रुख ने स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया। मई के महीने में पर्यटकों की संख्या में गिरावट न आने का एक मुख्य कारण यह था कि अधिकतर बुकिंग पहले ही हो चुकी थीं और ट्रैवल कंपनियाँ आखिरी समय में बुकिंग रद्द करने से मना कर रही थीं।

हालांकि, मई की बुकिंग पूरी होने के बाद, जून में भारतीय पर्यटकों की संख्या में तेज गिरावट देखने को मिली। इसका कारण यह था कि कई भारतीयों ने अज़रबैजान जाने की अपनी योजना को पूरी तरह से रद्द कर दिया। इस नकारात्मक प्रभाव का सबसे ज्यादा असर उन यात्रा कंपनियों और होटलों पर पड़ा है जो भारतीय पर्यटकों पर बहुत अधिक निर्भर थे।

यह स्थिति तुर्की के बाद अज़रबैजान के लिए एक बड़ी चेतावनी है। दोनों देशों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया था, जिसके बाद भारतीय पर्यटकों ने दोनों देशों से दूरी बना ली। भारतीय पर्यटक न सिर्फ यात्रा रद्द कर रहे हैं, बल्कि भविष्य में भी इन देशों की यात्रा की योजना बनाने से बच रहे हैं।

यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि भारत के आंतरिक मामलों में किसी भी देश का हस्तक्षेप, खासकर पाकिस्तान के पक्ष में, भारतीय नागरिकों को स्वीकार्य नहीं है और वे अपनी पसंद से इन देशों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाने में संकोच नहीं करते। इस तरह की प्रतिक्रिया न केवल एक मजबूत राजनीतिक संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय पर्यटक अब यात्रा स्थलों का चुनाव करते समय राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों पर भी ध्यान देते हैं।