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वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह का निधन

सैकड़ों पत्रकारों को गढ़ने वाले आजाद सिपाही के संस्थापक नहीं रहे

रांची: झारखंड के जाने-माने पत्रकार और ‘आजाद सिपाही’ के प्रधान संपादक हरिनारायण सिंह का रविवार दोपहर करीब 12 बजे सैमफोर्ड अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार थे। उनके निधन से पत्रकारिता जगत और संपूर्ण झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। रांची प्रेस क्लब में उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी गई, जिसके बाद हरमू स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र राकेश सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।

हरमू घाट पर पत्रकारों, परिचितों के अलावा प्रमुख राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक मौजूद थे। राज्यपाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हरिनारायण सिंह ने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन में निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ समाज और राज्य की सेवा की।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हरिनारायण सिंह का निधन पत्रकारिता जगत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण झारखंड के समाज की ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। उन्होंने हरिनारायण सिंह को पत्रकारिता की चलती-फिरती पाठशाला बताया।

हरिनारायण सिंह, जिन्हें हरि भाई या हरि सर के नाम से जाना जाता था, सिर्फ एक पत्रकार नहीं, बल्कि एक मानवीय व्यक्तित्व के धनी थे। वे गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए थे, लेकिन रांची और झारखंड को अपना घर बना लिया था। उन्होंने अपने साढ़े तीन दशक से अधिक के करियर में एकीकृत बिहार और झारखंड की पत्रकारिता को नया आयाम दिया।

हरि भाई ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कोलकाता में रविवार पत्रिका से की। इसके बाद चौथी दुनिया और आनंद बाजार पत्रिका में काम किया। 23 अक्तूबर, 1989 को वे ‘प्रभात खबर’ के लिए रांची आए। उन्होंने हिंदुस्तान के रांची संस्करण में वरीय स्थानीय संपादक और बाद में झारखंड के स्टेट हेड के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने न्यूज 11, सन्मार्ग और खबर मंत्र जैसे मीडिया संस्थानों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

2015 में हरिनारायण सिंह ने बिना किसी बड़ी पूंजी या कॉर्पोरेट समर्थन के अपना अखबार आजाद सिपाही शुरू किया। उनकी सोच, दूरदृष्टि और कड़ी मेहनत के दम पर आजाद सिपाही आज झारखंड के शीर्ष अखबारों में शुमार है। उन्होंने अपने अखबार को एक परिवार में बदल दिया, जहां लोग नौकरी नहीं, बल्कि घर का काम करते थे।

हरिनारायण सिंह अपनी ऊर्जा, उत्साह, जानकारी और मेहनत के लिए जाने जाते थे। वे मानवीय रिश्तों और संवेदनाओं को बहुत महत्व देते थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे किसी से बैर नहीं रखते थे और न ही किसी की निंदा करते थे। इसी कारण हर कोई उनका दोस्त बन जाता था।

अपने पत्रकारिता जीवन में हरि भाई ने सैकड़ों लोगों को पत्रकार बनाया, उन्हें रोजगार दिलाया और एक अभिभावक की तरह मार्गदर्शन किया। उन्होंने कभी किसी को काम से नहीं निकाला। झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (जेयूजे) के संरक्षक के रूप में उन्होंने पत्रकारों के हक की लड़ाई में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई।

हरि जी के आवास, प्रेस क्लब और मुक्तिधाम में उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, विधायक सरयू राय, विधायक अनूप सिंह, सांसद महुआ मांजी, सांसद प्रदीप वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता, पत्रकारिता जगत के लोग और आम नागरिक भारी संख्या में मौजूद थे। हरिनारायण सिंह के निधन से झारखंड के पत्रकारिता जगत में एक खालीपन आ गया है, जिसे भर पाना मुश्किल होगा।