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ईसी का मतलब इलेक्शन चोरी हो गयाः राहुल गांधी

अजीत अंजुम पर एफआईआर के बाद चुनाव आयोग पर नया हमला

  • वहां बीएलओ खुद भर रहे हैं फॉर्म

  • यह सरासर वोट चोरी करने का मामला

  • मीडिया संगठनों ने भी इसका विरोध किया है

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग (ईसी) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग अब पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनावी चोरी विंग बन गया है। राहुल गांधी का यह आरोप बिहार में कथित मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में धांधली को लेकर आया है, जहां चुनाव आयोग पर वोट चुराते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने का आरोप लगाया गया है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर का भी हवाला दिया। अंजुम ने दावा किया था कि बिहार में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) खुद ही गणना फॉर्म भर रहे थे और मतदाताओं की ओर से हस्ताक्षर कर रहे थे। राहुल गांधी ने अंजुम के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर की गई पोस्ट को टैग करते हुए कहा, बिहार में, चुनाव आयोग पकड़ा गया था।

मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर वोट चुराते रंगे हाथों। काम तो चोरी का है, लेकिन लेबल सर है – और इसे उजागर करने वाले पर एफआईआर दर्ज होगी! क्या चुनाव आयोग अब भी चुनाव आयोग है, या पूरी तरह से भाजपा की चुनावी चोरी शाखा बन गया है? उनके इस बयान से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अजीत अंजुम के खिलाफ सांप्रदायिक तनाव फैलाने के आरोप में दर्ज की गई प्राथमिकी पर भी व्यापक आलोचना हुई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (डीयूजे), एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख मीडिया संगठनों ने इस एफआईआर की कड़ी निंदा की है। इन संगठनों का मानना है कि यह एफआईआर पत्रकारों की आवाज दबाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित धांधली को उजागर करने वालों को चुप कराने का एक प्रयास है।

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दल बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले एसआईआर आयोजित करने और कुछ मामलों में जन्मतिथि, स्थान और माता-पिता से संबंधित दस्तावेज मांगने की चुनाव आयोग की कार्रवाई संदिग्ध है।

विपक्ष का दावा है कि एसआईआर एक प्रकार से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जैसी प्रक्रिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीबों और प्रवासी मजदूरों को उनके मताधिकार से वंचित करना है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है, ताकि इस प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सके और इसकी निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

राहुल गांधी ने 9 जुलाई को अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के साथ पटना स्थित बिहार मुख्य निर्वाचन कार्यालय (सीईओ) तक मार्च में भी हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने एसआईआर के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। उनकी मुख्य मांगों में से एक लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल होने वाली मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची और मतदान के दिन की सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करना है। हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी तक उनकी इन मांगों को नहीं माना है, जिससे विपक्ष का संदेह और गहरा गया है। यह पूरा घटनाक्रम भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्षता पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ रहा है।