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योगी सरकार पर सपा प्रमुख अखिलेश ने निशाना साधा

राज्य में डीजीपी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया आयी

लखनऊः उत्तर प्रदेश में नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। 1 जून, 2025 को प्रशांत कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को नया डीजीपी नियुक्त किया गया है। हालांकि, यादव ने इस नियुक्ति को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है और इसे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और राजनीतिक हस्तक्षेप का एक और उदाहरण बताया है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश को एक और कार्यवाहक डीजीपी मिल गया। यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि सपा प्रमुख राज्य सरकार द्वारा नियमित डीजीपी की बजाय कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति से असंतुष्ट हैं, जिसे वे प्रशासनिक अस्थिरता का प्रतीक मानते हैं।

यादव ने अपने पोस्ट में निवर्तमान डीजीपी प्रशांत कुमार पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा, आज जाते-जाते वह सोच रहे होंगे कि उन्हें क्या मिला, जो हर गलत को सही साबित करते रहे। अगर वह किसी व्यक्ति के बजाय संविधान और कानून के प्रति वफादार होते, तो कम से कम उन्हें अपनी नजरों में सम्मान तो मिलता। यह बयान दर्शाता है कि अखिलेश यादव का मानना है कि पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक दबाव में नहीं आना चाहिए और उन्हें संवैधानिक मूल्यों और कानून के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने नए डीजीपी राजीव कृष्ण के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, अब देखना यह है कि नया व्यक्ति पूरे प्रदेश में बुने गए जाल से खुद को मुक्त कर पाता है या नहीं और निष्पक्षता से न्याय कर पाता है या फिर वह भी जाल में फंसकर राजनीति का शिकार हो जाएगा। इस बयान से स्पष्ट है कि यादव का मानना है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन राजनीतिक हस्तक्षेप के एक बड़े जाल में फंसा हुआ है, और नए डीजीपी के लिए इस स्थिति से बाहर निकलकर निष्पक्षता से काम करना एक बड़ी चुनौती होगी।

सपा प्रमुख ने अपने बयान में केंद्र और राज्य के नेतृत्व के बीच कथित कलह पर भी सवाल उठाए। उन्होंने डबल इंजन सरकार (केंद्र और राज्य दोनों में एक ही पार्टी की सरकार) की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा, दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई का खामियाजा उत्तर प्रदेश की जनता और खराब कानून-व्यवस्था को क्यों भुगतना चाहिए।

जब डबल इंजन मिलकर एक अधिकारी नहीं चुन सकते, तो वे देश और राज्य कैसे चलाएंगे? यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि अखिलेश यादव का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी है, जिसका सीधा असर राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासन पर पड़ रहा है। वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यदि सरकारें मिलकर एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति भी ठीक से नहीं कर सकतीं, तो वे बड़े प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों को कैसे अंजाम देंगी।