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लगातार तीन दिन तक चली वक्फ मामले में सुनवाई

अदालत ने फैसला स्थगित करने की राय दी

  • तुषार मेहता ने अपनी गलती सुधार ली

  • अदालत ने कहा हर कोई स्वर्ग चाहता है

  • सभी धर्मों में ऐसी परंपरा पहले से ही है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: तीन दिन तक चली सुनवाई समाप्त हो गई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मैसी की पीठ ने संशोधित वक्फ अधिनियम से संबंधित मामले में अंतरिम फैसले पर रोक लगा दी। बुधवार को इस मामले में केंद्र की ओर से दलील देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिंदू देवोत्तर बोर्ड केवल धार्मिक गतिविधियों में शामिल होता है।

वक्फ संपत्ति का उपयोग धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है। उन्होंने आज उस टिप्पणी को गलत मान लिया। उन्होंने कहा, हिंदू बोर्ड धार्मिक कार्यों के अलावा सेवा कार्य भी करता है। मैंने केवल धार्मिक कार्य का उल्लेख किया था। संबंधित पक्षों के अनुसार, केंद्र की ओर से यह गलती स्वीकारोक्ति महत्वपूर्ण है।

आज सुनवाई की शुरुआत में देश के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि वक्फ अधिनियम को निलंबित किया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है। तुषार मेहता ने स्थगन प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा, विधानसभा में पारित किसी कानून पर सिर्फ इसलिए रोक नहीं लगाई जा सकती कि उस पर प्रस्ताव के संदर्भ में चर्चा की जा सकती है।

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने फैसला स्थगित करने का फैसला किया। उन्होंने वादियों से कहा, अदालत को इस बात से संतुष्ट होना चाहिए कि कानून को क्यों निलंबित किया जाना चाहिए। जवाब में, वादियों के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, वक्फ ईश्वर को समर्पित संपत्ति है। जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, दान के संबंध में अन्य धर्मों में भी इसी प्रकार के कानून हैं।

तब सिब्बल ने कहा, यह समुदाय को संपत्ति का दान है। और इस मामले में, उपहार भगवान के लिए है। जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हिंदू धर्म में भी मोक्ष की अवधारणा है। न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज ने कहा, ऐसी अवधारणा ईसाई धर्म में भी मौजूद है। हर कोई मृत्यु के बाद स्वर्ग जाना चाहता है।

आज अदालत में यह सवाल भी उठाया गया कि वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य क्यों होंगे। इस मुद्दे पर सुनवाई पिछले मंगलवार को शुरू हुई थी। उस दिन सुप्रीम कोर्ट ने वादी पक्ष की दलीलें सुनीं। केंद्र का बयान बुधवार को सुना गया। दोनों पक्षों के बयान सुनने के बाद आज फैसला स्थगित कर दिया गया।