ऑपरेशन सिंदूर से लेकर रगों में सिंदूर तक का गीत सुपरहिट है। फिर भी अब तक इ कनफूजियन कायम है कि आखिर ट्रंप भइया ने अइसा क्यों कहा कि युद्धविराम तो उन्होंने ही कराया है। बात को यूं ही टाल भी नहीं सकते क्योंकि वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप है, कोई अइसे वइसे आदमी नहीं है।
दूसरी बात है कि सबसे पहले इस बात का एलान भी तो उन्होंने ही किया। तो उन्हें क्या कोई दिव्यज्ञान प्राप्त है या आकाशवाणी हुई थी उनके पास। जब भी इस पर सवाल करो तो पाकिस्तान समर्थन होने की दलील कुछ हजम नहीं होती। अब तो इससे आगे ट्रंप यह धमकी भी खुलेआम दे रहे हैं कि अगर एप्पल ने अपना फोन भारत में बनाया तो वह पच्चीस परसेंट टैरिफ लगा देंगे। अब ट्रंप भारत के पक्ष में हैं अथवा विपक्ष में यह सोचना आपका काम है।
लगे हाथ पाकिस्तान के नये फील्ड मार्शल असीम मुनीर को भी तौल लें। हाल के दिनों में सोशल मीडिया में पाकिस्तानी जनरलों के तमगों पर मजाक बन रहा था। हर कोई कह रहा था हर लड़ाई तो हार गये तो इतना सारा मेडल किस चीज का है। यही सवाल जनरल मुनीर से भी है कि आखिर आपने कमाल क्या किया है कि अचानक से फील्ड मार्शल बन बैठे।
छोटी समझ की बात है कि भाई मुनीर को कुर्सी प्रेम हो गया है और शायद कुर्सी जाने के बाद का भय भी सता रहा है। इसलिए कानूनी तौर पर खुद को सुरक्षित रखने की चाल चली है और पाकिस्तान की सरकार की दरअसल क्या हालत है, यह तो ऑपरेशन सिंदूर से साफ हो गया है। इमरान खान जेल में है, नवाज शरीफ किनारे हैं तो बेचारे शहवाज शरीफ को बलि का बकरा बना रखा है। उसे भी पता है कि सेना नाराज हो गयी तो एक दिन में कुर्सी चली जाएगी।
इस संक्षिप्त लड़ाई का एक फायदा यह हुआ है कि अब पाकिस्तान के नेता और जनरल बात बात पर परमाणु बम की धमकी नहीं दे रहे हैं। अपने मोदी जी ने साफ साफ कर दिया है कि बार बार इस परमाणु बम की धमकी से काम नहीं चलेगा। आतंकी घटना हुई तो उसे भी युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। पाकिस्तान के लोग जैश ए मोहम्मद और लश्करे तैयबा के ठिकानों पर हुए मिसाइल हमलों पर बात करते हुए सिर्फ यह कहते हैं कि वहां मदरसा और मस्जिद थी। वह किसकी थी और वहां क्या काम होता था, यह सवाल उनकी चर्चा में नहीं आता।
इसी बात पर प्रसिद्ध पुरानी फिल्म तीसरी कसम का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था शैलेंद्र ने और संगीत में ढाला था शंकर जयकिशन ने। इसे मुकेश कुमार ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल इस तरह हैं।
सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है
न हाथी है ना घोड़ा है, वहाँ पैदल ही जाना है
तुम्हारे महल चौबारे, यहीं रह जाएंगे सारे
तुम्हारे महल चौबारे, यहीं रह जाएंगे सारे
अकड़ किस बात कि प्यारे
अकड़ किस बात कि प्यारे, ये सर फिर भी झुकाना है
सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है …
भला कीजै भला होगा, बुरा कीजै बुरा होगा
भला कीजै भला होगा, बुरा कीजै बुरा होगा
बही लिख लिख के क्या होगा
बही लिख लिख के क्या होगा, यहीं सब कुछ चुकाना है
सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है …
लड़कपन खेल में खोया, जवानी नींद भर सोया
लड़कपन खेल में खोया, जवानी नींद भर सोया
बुढ़ापा देख कर रोया
बुढ़ापा देख कर रोया, वही किस्सा पुराना है
सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है
न हाथी है ना घोड़ा है, वहाँ पैदल ही जाना है
सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है …
अब दूसरी तरफ जयशंकर जी का वह बयान है, जिसे राहुल गांधी पकड़ कर बैठ गये हैं कि हमला से पहले पाकिस्तान को सूचित करने का फैसला किसका था। बचाव में विदेश मंत्रालय और भाजपा आयी है। अब मोदी जी ने नया शगूफा छोड़ा है कि उनके रगों में गर्म सिंदूर दौड़ रहा है। अब पारा से बना सिंदूर रहों में कैसे दौड़ रहा है, यह मेडिकल साइंस का विषय है। मान लिया कि जोश जोश में ऐसा कह गये पर इतना जोश है तो संसद का सत्र बुलाकर वहां असली जानकारी दे देते। वहां विपक्ष का सामना करने में गर्म सिंदूर कहां चला जाता है।
अब झारखंड में चौबे जी अचानक से गिरफ्तार हो गये। इससे एक कहावत सही साबित होती है कि राजा के अगाड़ी और घोड़ा के पिछाड़ी नहीं चलना चाहिए वरना दुलत्ती पड़ जाती है। बेचारो खुद को सुपर सीएम समझने की गलती कर बैठे। ऊपर से पुलिस का बंगला लेकर तिकड़मी अफसरों को नाराज कर लिया। इसलिए कहता हूं कि सजन रे झूठ मत बोलो।