Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Crime News: शराब के नशे में अंधे ससुर की हैवानियत, बहू के साथ किया दुष्कर्म; विरोध करने पर दी जान से... "फेल हो गई मोदी सरकार की विदेश नीति!" गैस किल्लत पर बरसे इरफान अंसारी; बोले- ईरान-इजराइल युद्ध का बह... Pakur Coal Mining News: पाकुड़ में विस्थापितों का अनिश्चितकालीन धरना, मूलभूत सुविधाओं के लिए अड़े ग्... रांची सिविल कोर्ट में 'बम' का खौफ! फिर मिली उड़ाने की धमकी; कोर्ट परिसर खाली, डॉग स्क्वायड और BDS टी... सरकारी योजना का 'फ्यूज' उड़ा! सिंचाई के लिए नहीं मिला पानी, तो किसानों ने लगाया अपना 'सोलर सिस्टम'; ... झारखंड विधानसभा में भारी बवाल! आजसू विधायक तिवारी महतो 'मार्शल आउट', भाजपा का वेल में हंगामा; जानें ... रांची में खराब मौसम का कहर! एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट नहीं कर सकी लैंडिंग; हवा में चक्कर काटने ... रांची में एलपीजी को लेकर हाहाकार! मिडिल ईस्ट युद्ध के खौफ से गैस एजेंसियों पर लगी लंबी कतारें; प्रशा... "अफसरों की मनमानी नहीं चलेगी!" बजट सत्र के 10वें दिन अचानक 'एक्शन' में आई बीजेपी; सदन में अफसरशाही क... Sahibganj Road Accident: साहिबगंज में बाइक हादसे का शिकार, दो दोस्तों की मौके पर ही मौत; ओवरस्पीडिंग...

रिम्स निदेशक के पीछ दिल्ली दरबार का हाथ

कांग्रेस के अंदर भी इरफान के फैसलों को लेकर गुटबाजी

  • दिल्ली का खूंटा मजबूत है निदेशक का

  • अनेक लोगों जानकर भी चुप्पी साध गये

  • अब पार्टी में टाइम पास का नया विषय बना

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रिम्स के निदेशक को पद से हटाने का झारखंड सरकार का फैसला उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। दरअसल राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी भी शायद इस बात से अनभिज्ञ थे कि रिम्स के वर्तमान निदेशक को दिल्ली के एक ताकतवर मंत्री की पैरवी पर बहाल किया गया था और वह इसी ताकत से अपना काम कर रहे थे।

अब तो उच्च न्यायालय ने निदेशक को हटाने के फैसले पर रोक लगा दी है तो कांग्रेस के अंदर भी इसे लेकर गुटबाजी उभर रही है। मजेदार बात यह है कि रिम्स निदेशक को हटाने के फैसला का एक जैसा असर भाजपा के अंदर भी है। दोनों राजनीतिक दलों में इस फैसले के पक्ष और विपक्ष की गोलबंदी साफ नजर आ रही है।

जानकार मानते हैं कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को शायद पर्दे के पीछे की ताकत के बारे में उनके करीबी लोगों ने आगाह ही नहीं किया था। इसका एक मकसद मंत्री जी को बड़े पहाड़ के नीचे लाना था। अब उच्च न्यायालय से सरकार के फैसले पर रोक के बाद शायद करीबी लोग यह बता देंगे कि रिम्स के निदेशक को दरअसल यहां किस केंद्रीय मंत्री ने भेजा था और इस पैरवी की वजह से वह पूरी ताकत के साथ अब तक काम करते रहे।

इस एक फैसले से यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता चाहे किसी भी पार्टी की हो पर सभी दलों में एक साथ मिलकर काम करने वालों की कमी नहीं होती है। यह स्थिति कांग्रेस में पहले भी देखी गयी थी जब यहां के प्रभारी आरपीएन सिंह थे, जो भाजपा के इशारे पर ऐसे फैसले लेते थे, जिससे कांग्रेस को नुकसान और भाजपा को फायदा होता था। आरपीएन सिंह बड़ी ताम झाम के साथ भाजपा में शामिल हुए थे पर आज के दौर में वह लगभग मुख्यधारा की राजनीति से गुम हो चुके हैं।

झारखंड कांग्रेस की बात करें तो आलमगीर आलम और डॉ रामेश्वर ऊरांव के मंत्रिमंडल में नहीं होने की वजह से पार्टी का आंतरिक समीकरण बिगड़ा बिगड़ा नजर आता है। वरना दोनों वरिष्ठ नेताओं के दौर में पार्टी का हर मंत्री और विधायक नियमित तौर पर प्रदेश कार्यालय आता था क्योंकि डॉ ऊरांव खुद नियमित पार्टी कार्यालय आते थे और संगठन का सारा काम काज यही से होता था। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की सक्रियता से संगठन नये सिरे से जिंदा हो रहा है पर संगठन के पुराने पापी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अब इरफान अंसारी वनाम रिम्स निदेशक भी ऐसे लोगों के लिए जुगाली का नया टाईम पास दे गया है।