Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Nasha Mukti Abhiyan: नशे को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध; सख्त कानून और जन-जागरूकता पर जो... Administrative Reshuffle: पुलिस महकमे में हलचल; सुपरिटेंडेंट और डिप्टी सुपरिटेंडेंट के तबादले, जेल प... Ludhiana Crime: लुधियाना में शादी की खुशियों के बीच खूनी खेल! 10-15 हमलावरों ने घर के बाहर बोला धावा... Punjab Drug War: नशे के खिलाफ 'महाजंग'! पंजाब गवर्नर के साथ कदम से कदम मिलाकर चले डेरा ब्यास प्रमुख,... बांग्लादेश आम चुनाव की राजनीतिक अनिश्चितता Punjab Weather Update: पंजाब में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! 14 तारीख तक बारिश का अलर्ट, मौसम विभाग ने... Van Rakhi Movement: वन राखी मूवमेंट के 50 साल पूरे! पलामू में खुलेगा दुनिया का पहला 'पर्यावरण धर्म म... दक्षिण कोरिया और अमेरिका का हवाई अभ्यास Nigam Chunav 2026: ऑटो-टोटो चालकों को निगम चुनाव से बड़ी उम्मीद; 'पार्किंग नहीं तो वोट नहीं' के सुर ... Jharkhand Weather Update: झारखंड में 'दोहरा' मौसम! गुमला में 5 डिग्री के साथ कड़ाके की ठंड, तो चाईबा...

शांति और समृद्धि हेतु दक्षिण एशियाई एकता आवश्यकः परमानंद झा

गुवाहाटी के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए नेपाल के पूर्व उपराष्ट्रपति

  • अधिवक्ता प्रशांत भूषण भी शामिल हुए

  • यूरोपीय संघ की तरह एकजुट हो सभी

  • संयुक्त राष्ट्र को भी बदला जाना चाहिए

 राष्ट्रीय खबर

गुवाहाटीः नेपाल के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री परमानंद झा ने गुवाहाटी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि दक्षिण एशियाई देशों को यूरोपीय संघ की तरह एकजुट होकर एक संघ बनाना चाहिए। उन्होंने भारत और नेपाल से सार्क का विस्तार कर इस दिशा में तत्काल पहल करने का आह्वान किया। उन्होंने भागीदारी और शांति पर वैश्विक संधि  द्वारा अंतरिम विश्व संसद स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की और स्वयं को दक्षिण एशियाई यूनियन का पहला संयोजक चुने जाने पर आभार व्यक्त किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सम्मेलन में कहा कि संकीर्ण राष्ट्रवाद और अंधी वैश्विक प्रतिस्पर्धा बेरोजगारी के मुख्य कारण हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक मानवाधिकारों के लिए संगठन की पहल की प्रशंसा की और कहा कि दक्षिण एशियाई संघ और संयुक्त राष्ट्रीय सरकार की स्थापना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने सभी से विश्व परिवर्तन मिशन का समर्थन करने की अपील की।

विश्व परिवर्तन मिशन के संस्थापक श्री विश्वात्मा ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि तीसरे विश्व युद्ध की आशंका से पहले संयुक्त राष्ट्र संघ को संयुक्त राष्ट्रीय सरकार में बदला जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी देशों को ‘भागीदारी और शांति मंत्रालय’ स्थापित करना चाहिए, जिसकी शुरुआत भारत से होनी चाहिए।

गुवाहाटी हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश श्री पी.आर. मोसाहारी ने कहा कि युद्धों पर कानूनी प्रतिबंध लगाना आवश्यक हो गया है, क्योंकि एक बार युद्ध शुरू हो जाने के बाद शांति प्रयास अप्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव के प्रति विशेष रूप से आगाह किया। नेपाल के पूर्व सांसद श्री हरिचरण साह ने कहा कि यूरोपीय देशों ने राष्ट्रवाद को अस्वीकार कर वैश्विक राष्ट्रवाद की राह खोली है।

उन्होंने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र सक्षम होता, तो कई युद्ध रोके जा सकते थे। वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती बबिता शर्मा गोयल ने कहा कि कई लोग संप्रभुता के कारण विश्व सरकार की संभावना को असंभव मानते हैं, लेकिन इतिहास में बड़े परिवर्तन पहले भी हुए हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को संयुक्त राष्ट्रीय सरकार में बदलने का समर्थन किया।

राजनीतिक चिंतक प्रो. संजय शर्मा ने कहा कि अमेरिका की नीति युद्ध शुरू करने और फिर युद्ध-विरोधी नेतृत्व को चुनने की रही है। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर एकजुटता प्रदर्शित की जाए, तो अमेरिका और अन्य वीटो-शक्ति प्राप्त देश भी विश्व सरकार के गठन का समर्थन करने लगेंगे। अस्पताल प्रबंधन विशेषज्ञ श्री मिराज साहब ने कहा कि दक्षिण एशियाई यूनियन से क्षेत्रीय आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी, मुद्रा मजबूत होगी, व्यापार बढ़ेगा और महंगाई घटेगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और पाकिस्तान के नागरिक आर्थिक लाभ के कारण अपनी सरकारों को सहयोगी नीति अपनाने के लिए विवश करेंगे। सम्मेलन में अन्य वक्ताओं ने भी वैश्विक शांति, मानवाधिकारों और युद्ध रोकने के कानूनी उपायों पर जोर दिया। इस संगठन को एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में स्थापित करने और विश्व सरकार के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया गया।