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कोयला खनन में 1,000 करोड़ रुपये का घोटाला

उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर कारोबार

  • खदान में खनिक फंसने से मामला खुला

  • चार मजदूरों के शव अब तक बरामद

  • अंदर फंसे हैं अब भी आठ खनन कर्मी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : असम में अवैध कोयला खदान में मजूदरों के फंसने पर राजनीति शुरू हो चुकी है। गुरुवार को विपक्षी दलों ने अवैध कोयला खदान में खनिकों के फंसने की घटना को लेकर असम सरकार की आलोचना की और कहा कि यह घटना प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण हुई। विपक्ष ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए न्यायिक जांच की मांग की।

कांग्रेस ने शुक्रवार को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देने की घोषणा की है, वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कई सहयोगी संगठनों ने प्रशासन की लापरवाही के विरोध में गुवाहाटी में प्रदर्शन किया। अवैध कोयला खदान में 5 दिन से फंसे 8 खनिक और 4 शव आज बरामद हुए हैं।

असम जातीय परिषद  के अध्यक्ष लुईन ज्योति गोगोई और महासचिव जगदीश भुया ने आरोप लगाया है कि असम में 1,000 करोड़ रुपये का बड़ा कोयला घोटाला हुआ है और मुख्यमंत्री के करीबी लोग इसमें शामिल हैं। नेताओं ने इसमें मुख्यमंत्री के करीबी देबलाल गारलोसा और तुलिराम रोंगहांग वाहिनी के शामिल होने का आरोप लगाया।

असम की विपक्षी क्षेत्रीय पार्टी एजेपी ने मांग की है कि डालमिया, स्टार, विनय, टोपकेम सिनांत को जांच के दायरे में लाया जाए। असम के दीमा हसाओ जिले में एक अवैध कोयला खदान में फंसे खनिकों का पता लगाने के लिए गुरुवार को चौथे दिन भी कई राज्य और केंद्रीय एजेंसियों का बचाव अभियान जारी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने यहां संवाददाताओं से कहा,  इतनी बड़ी घटना के बावजूद पुलिस, सीबीआई, आयकर, सभी चुप हैं। क्या कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस घटना के दोषियों को पकड़ने के लिए कोई कार्रवाई करेंगी? उन्होंने असम में कोयला सिंडिकेट में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और औद्योगिक श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

अब तक किसी जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं और सरकार दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीआईटीयू), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) जैसे वामपंथी समूहों ने गुवाहाटी में संयुक्त विरोध प्रदर्शन किया और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की असम इकाई ने भी न्यायिक जांच और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की। टीएमसी की राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने कहा इस घटना के बाद कई अनुत्तरित प्रश्न हैं। इस खदान का मालिक कौन है? क्या यह अवैध खदान नहीं है? फिर यह खदान इतने लंबे समय तक कैसे चल सकी?

एक अधिकारी ने कहा कि कोल इंडिया दीमा हसाओ जिले के 3 किलो उमरंगसो क्षेत्र में फंसे खनिक के बचाव प्रयासों में सहायता के लिए पंप तैनात करेगा। कोल इंडिया, कोलकाता के महाप्रबंधक, संजय कुमार ने कहा, जैसे ही हमें खबर मिली, हमें आने और अधिकतम संभव मदद करने के लिए कहा गया। हमें नागपुर से एक नया पंप मिला।

कल हमने पंप का परीक्षण किया। विद्युत पावर जनरेटर तैयार है। इस बीच, छोटे पंप भी शुरू हो गए हैं। पानी भी कम हो रहा है। आज हम एक प्लेटफॉर्म बनाने की कोशिश करेंगे और फिर हम पाइप को नीचे करेंगे। एनडीआरएफ की पहली बटालियन के कमांडेंट एचपीएस कंडारी ने कहा, इस कुएं से पानी निकाला जा रहा है और दूसरे कुओं से पानी इस कुएं में डाला जा रहा है।

ये शव चूहे के बिल में फंस गए थे जो अब पानी के साथ मुख्य कुएं में आ रहे हैं। गंगा बहादुर श्रेठ के रूप में पहचाने गए पहले शव को बरामद किया। घटना के बाद, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज करने और एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की घोषणा की।