जंगल के दावानल के राहत अभियान से नया राजनीतिक विवाद खड़ा
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सात सौ लोगों ने इसकी शिकायत की
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अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी हो रही
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बचाव कर्मी अमीरों का घर बचा रहे थे
एजेंसियां
पेरिसः दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के गिरोंड क्षेत्र में हाल ही में लगी भीषण आग ने न केवल भौतिक क्षति पहुंचाई है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक-राजनीतिक विवाद को भी जन्म दिया है। ले पोर्ज नामक छोटे से कस्बे के लगभग 700 निवासी अब फ्रांसीसी सरकार और दमकल विभाग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। निवासियों का आरोप है कि जानबूझकर उनके गांव को आग की भेंट चढ़ने के लिए छोड़ दिया गया, ताकि धनी लोगों के निवास वाले कैप फेरेट प्रायद्वीप को बचाया जा सके।
यह विवाद तब और गहरा गया जब आंकड़े सामने आए कि पिछले दो सप्ताह में नष्ट हुए 240 घरों में से 183 केवल ले पोर्ज कस्बे के थे। कस्बे की कुल 1,500 इमारतों में से 10 प्रतिशत से अधिक का जलकर राख हो जाना एक बड़ी त्रासदी है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि दमकल की गाड़ियों को उनकी जान और संपत्ति बचाने के बजाय, फ्रांस के हैम्पटन्स के नाम से प्रसिद्ध और प्रभावशाली लोगों के गढ़, कैप फेरेट की ओर मोड़ दिया गया। यहाँ फ्रांसीसी अरबपति जेवियर निएल और अभिनेत्री मैरियन कोटिलार्ड जैसी हस्तियों के आलीशान विला स्थित हैं।
स्थानीय निवासियों के इस विरोध का नेतृत्व कर रहीं लुदिवीन डौरिग्नैक ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराना और पीड़ितों के लिए मुआवजा सुनिश्चित करना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे खुद को पूरी तरह असहाय और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु ने इसे षड्यंत्रकारी सोच करार देते हुए कहा कि यह सोचना पूरी तरह बेतुका है कि दमकल विभाग किसी कस्बे की संपत्ति के आधार पर निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि निवासियों का दर्द तो समझ में आता है, लेकिन सोशल मीडिया पर निराधार बातें फैलाना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है। इस घटना ने अमीर और गरीब के बीच की खाई को उजागर कर दिया है, जिससे अब फ्रांस की प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह केवल आग का कहर था या वाकई में कोई प्रशासनिक पक्षपात।