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शेख मुजिबुर्रहमान का अब किताबों में उल्लेख नहीं

बांग्लादेश की स्वाधीनता का इतिहास भी बदलकर लिखा गया

  • खालिदा जिया के पति का महिमामंडन

  • स्कूलों में अब यही इतिहास पढ़ाया जाएगा

  • जियाउर रहमान सेना में महज एक मेजर थे

राष्ट्रीय खबर

ढाकाः बांग्लादेश में आजादी की घोषणा करने वाले का नाम बदला गया है। नई पाठ्यपुस्तकें लॉन्च करने के बाद यह जानकारी सामने आयी है। बांग्लादेश में नए शैक्षणिक वर्ष 2025 से विद्यार्थियों के लिए नई पाठ्यपुस्तकें शुरू की गई हैं। देश की आजादी की घोषणा करने वाले व्यक्ति के रूप में मुजीबुर रहमान का नाम वहां नहीं लिया गया। कई अन्य परिवर्तन भी किये गये हैं।

बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान वह व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। उद्घोषक का नाम बदल गया है बांग्लादेश में आजादी की घोषणा करने वाले का नाम बदला गया, मुजीब नहीं, यूनुस के साथ नई पाठ्यपुस्तकें लॉन्च की।

बांग्लादेश में नए शैक्षणिक वर्ष 2025 से विद्यार्थियों के लिए नई पाठ्यपुस्तकें शुरू की गई हैं। देश की आजादी की घोषणा करने वाले व्यक्ति के रूप में मुजीबुर रहमान का नाम वहां नहीं लिया गया। कई अन्य परिवर्तन भी किये गये हैं।

बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान वह व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। उद्घोषक का नाम बदल गया है। बांग्लादेश में 2025 से बच्चों के लिए नई पाठ्यपुस्तकें शुरू की जाएंगी। वहां, बीएनपी नेता खालिदा जिया के पति जियाउर रहमान का नाम देश की आजादी की घोषणा करने वाले व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध है।

वह 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान बांग्लादेश सेना में मेजर थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, नई पाठ्यपुस्तक में स्वतंत्रता के समय की जानकारी बदल दी गई है। ये पाठ्यपुस्तकें 2025 शैक्षणिक वर्ष से लागू की जा रही हैं। अब तक बांग्लादेशी पाठ्यपुस्तकों में यही लिखा होता था कि मुजीबुर ने 26 मार्च, 1971 को रेडियो प्रसारण के ज़रिए बांग्लादेश की आज़ादी की घोषणा की थी।

इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन बांग्लादेशी शोधकर्ताओं का एक वर्ग दावा करता है कि यह जानकारी सटीक नहीं है। शोधकर्ता राखल राहा ने पाठ्यपुस्तक को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका दावा है कि यह अतिरंजित एवं थोपा हुआ इतिहास है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस जानकारी का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

बांग्लादेश की नई पाठ्यपुस्तकों में कहा गया है कि जियाउर ने 26 मार्च 1971 को बांग्लादेश को स्वतंत्र घोषित किया था। इसके बाद 27 मार्च को उन्होंने बंगबंधु की ओर से फिर यही घोषणा की। ऐसी भी खबरें हैं कि बांग्लादेशी पाठ्यपुस्तकों में अब मुजीब को राष्ट्रपिता के रूप में संदर्भित नहीं किया जाता है।

ये परिवर्तन कक्षा एक से कक्षा दस तक की पाठ्यपुस्तकों में किए जा रहे हैं। ये पाठ्यपुस्तकें बांग्लादेश में 2010 में मुजीब की बेटी शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद शुरू की गयी थीं। हसीना को 5 अगस्त को बांग्लादेश की सत्ता से हटा दिया गया था। बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के कारण वह देश छोड़कर भारत चले गए। 8 अगस्त को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बांग्लादेश में सत्ता में आई। इसके बाद पाठ्यपुस्तक बदलने का निर्णय लिया गया।