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प्रदर्शनकारी किसानों को हटाने की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा इससे संबंधित मामला पहले ही लंबित

  • एक विषय पर बार बार चर्चा नहीं

  • सामाजिक कार्यकर्ता की याचिका

  • सीमा पर लगे हुए हैं अनेक अवरोधक

नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने राजमार्गों को अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों और किसानों को वहां से तत्काल हटाने की मांग संबंधी जनहित याचिका सोमवार को यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह अदालत संबंधित मामले में पहले से ही सुनवाई कर रही है। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता गौरव लूथरा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस संबंध में एक याचिका पहले से ही इस अदालत के समक्ष लंबित है।

अदालत एक ही मुद्दे पर बार-बार याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकती। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, इस अदालत ने पहले ही कुछ पहल की हैं। इसके बावजूद आप याचिका दायर करते हैं। ऐसा लगता है कि कोई यहां दर्शकों को लुभाने के लिए याचिका दायर कर रहा है और प्रचार के लिए याचिका दायर की गई है।

पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनकी प्रार्थना यात्रियों की दुर्दशा के संबंध में है। अदालत द्वारा किसानों की शिकायतों के हल के लिए कदम उठाए जाने के बाद भी आंदोलन जारी है। इस पर पीठ ने वकील से कहा, हमें सब कुछ पता है। ऐसा नहीं है कि याचिकाकर्ता ही समाज की अंतरात्मा की आवाज है और बाकी लोग नहीं जानते।

बार-बार याचिका दायर न करें। अगर आप लंबित जनहित याचिका में सहायता करना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। याचिकाकर्ता श्री लूथरा ने अपनी याचिका में राजमार्गों को अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों और किसानों को तत्काल हटाने के लिए शीर्ष अदालत से केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश जारी करने की गुहार लगाई थी।

कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसान कई महीने से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा रोके जाने के बाद किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। शीर्ष अदालत ने 2 सितंबर को एक अलग मामले में सुनवाई करते हुए किसानों से बातचीत करने के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति नवाब सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था।

किसान 13 फरवरी से शंभू बॉर्डर पर विभिन्न मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के अलावा किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करने और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की मांगें शामिल हैं।

शीर्ष अदालत ने गत 02 दिसंबर को कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकता है, लेकिन लोगों को असुविधा न हो। इसके बाद अदालत ने पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल से कहा था कि वे प्रदर्शनकारी किसानों को राजमार्गों को बाधित करने और लोगों को असुविधा न करने के लिए मनाएँ।

श्री लूथरा की जनहित याचिका में पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार को किसानों के विरोध पर प्रतिबंध हटाने और यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है कि आंदोलनकारी किसानों द्वारा सभी राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे ट्रैक को अवरुद्ध न किया जाए। याचिका में पंजाब, हरियाणा और केंद्र को एक सप्ताह के भीतर शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड्स खोलने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि आम जनता को असुविधा से राहत मिल सके।

याचिका में कहा गया है, अगर प्रदर्शनकारी राज्य द्वारा तय सीमा से अधिक प्रदर्शन करते हैं, तो राज्यों को उनके खिलाफ कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। सभी किसान यूनियनों को कानून और व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए जाने चाहिए। पंजाब राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि उनके क्षेत्रों में एकत्र प्रदर्शनकारियों को उचित रूप से नियंत्रित किया जाए।

याचिका में कहा गया है कि कथित किसानों और उनके यूनियनों ने एक साल से अधिक समय से पंजाब के प्रवेश बिंदु यानी शंभू में राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर रखा है और हाल ही में 24 अक्टूबर को पूरे पंजाब राज्य में विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया था।

याचिका में कहा गया है, राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों का अवरुद्ध होना राष्ट्रीय सुरषा के लिए भी खतरा है, क्योंकि देश की उत्तरी सीमाओं की ओर सेना का पूरी आवाजाही पंजाब से होती है। पंजाब में विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हैं। अब आम जनता के साथ-साथ सेना को भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए संकरी ग्रामीण सड़कों से वैकल्पिक मार्ग से पंजाब से गुजरना पड़ता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि लोग चिकित्सा आपातकाल की स्थिति में समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं, क्योंकि पूरे पंजाब में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर एंबुलेंस को भी चलने से रोका जा रहा है। इसके अलावा पंजाब के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के पूरे हिस्से पर इन कथित अतिक्रमणकारियों द्वारा पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस, दूध, सब्जियां, दवाइयां आदि जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी कई बार रोक दी जाती है।