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भरोसा जमने में अभी वक्त लगेगाः आर्मी चीफ

अरुणाचल की 2 जगहों पर भारत दे गश्‍त लगाने का अधिकार

  • सीमा पर सांझा गश्त पर सहमति

  • बफर जोन में तनाव कम करना होगा

  • चीन के निशाने पर अब भी तवांग है

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: चीनी ड्रैगन ने नई चाल चल दी है जिसे मानना भारत के लिए असंभव होगा। चीनी वार्ताकारों ने भारत से मांग की है कि वह अपने अरुणाचल प्रदेश के दो संवेदनशील इलाकों में चीनी सेना को गश्‍त लगाने की अनुमति दे। चीन ने यह मांग तब की है जब उसने लद्दाख के पास कराकोरम पठार में क्रूज मिसाइल को मार गिराने का टेस्‍ट किया है।

अरुणाचल के इन दोनों ही जगहों पर चीन कई बार घुसने का प्रयास कर चुका है लेकिन भारत ने रोक रखा है। चीन चाहता है कि बातचीत के दौरान भारत पर दबाव बनाया जाए। साथ अपनी ताकत को दिखाया जाए। भारत ने चीन को जवाब देने के लिए ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को तैनात किया है।

चीन लंबे समय से तवांग पर अपना दावा करता रहा है। अब नई मांग से तनाव सुलझने के आसार कम दिख रहे हैं। भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पेट्रोलिंग समझौते के बाद मंगलवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम अपना सीमा विवाद मिलकर सुलझाएंगे।

इंडियन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को इस समझौते को अच्छा कदम बताया। उन्होंने कहा- सबसे पहले दोनों देशों को दोबारा विश्वास पैदा करना होगा। इसके लिए सैनिकों का एक-दूसरे को देखना और बातचीत करना जरूरी है। पेट्रोलिंग के जरिए इसके लिए सही माहौल मिलेगा। भारत और चीन ने एक दिन पहले  पेट्रोलिंग पर सहमति जताई थी।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, हम दोबारा भरोसा हासिल करने की प्रोसेस में हैं। इसमें वक्त लगेगा। सेनाओं का पीछे हटना, बफर जोन मैनेजमेंट भी इसके लिए अहम है। हम भरोसा कैसे पैदा करेंगे? जब हम एक-दूसरे को सुन सकेंगे और एक-दूसरे को संतुष्ट कर सकेंगे। हम यह भरोसा जता पाएंगे कि जो बफर जोन बनाए गए हैं, हम उसमें जाएंगे।

पेट्रोलिंग से आपको ये प्रोसेस करने में आसानी होगी। दोनों पक्षों को एक-दूसरे को समझाने का मौका मिलेगा। एक बार भरोसा जम गया तो इसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा।

भारत के आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि भारत और चीन के बीच अप्रैल से अब तक कमांडर लेवल की 17 बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में हमने कई मुद्दों पर चर्चा की है। चीन के साथ विवाद का 75 फीसद हल निकल गया है। विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि सीमा पर बढ़ते सैन्यीकरण का मुद्दा अभी भी गंभीर है।