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कांग्रेस ने सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच से मांगा इस्तीफा

हिंडनबर्ग रिपोर्ट की आंच में अब भी झुलस रही है केंद्र सरकार

  • दोहरा लाभ का मुद्दा भी उठ गया अब

  • आईसीआईसीआई से वेतन कैसे ले रही

  • अडाणी मामले में पहले ही जुड़ चुका नाम

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने कहा है कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख माधवी पुरी बुच पद पर रहते हुए आईसीआईसी बैंक से भी मोटा वेतन ले रही हैं और यह सेबी के नियमों का उल्लंघन है, इसलिए उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस बारे में देश को जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सेबी प्रमुख ने नियमों का उल्लंघन किया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जब सब कुछ मालूम था तो उन्हें बताना चाहिए कि  श्रीमती बुच को उनके पद से हटाया क्यों नहीं गया है। उन्होंने कहा, देश में शतरंज का खेल चल रहा है। इसी शतरंज के खेल का एक मोहरा माधवी पुरी बुच हैं।

श्रीमती बुच पांच अप्रैल 2017 से चार अक्टूबर 2021 तक सेबी में पूर्णकालिक सदस्य थीं। फिर दो मार्च 2022 को श्रीमती बुच सेबी की चेयरपर्सन बनीं। सेबी की चेयरपर्सन को नियुक्त करने वाली कैबिनेट में श्री मोदी और श्री अमित शाह है। श्रीमती बुच सेबी की पूर्णकालिक सदस्य होते हुए रेगुलर इनकम आईसीआईसीआई बैंक से ले रही थीं जो कि 16.80 करोड़ रुपए था। यही नहीं, वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, ईएसओपी और ईएसओपी का टीडीएस भी आईसीआईसीआई बैंक से ले रही थीं।

उन्होंने कहा, हम जानना चाहते हैं कि आप सेबी की पूर्णकालिक सदस्य होने के बाद भी अपना वेतन आईसीआईसीआई से क्यों ले रही थीं। यह सीधे-सीधे सेबी के सेक्शन-54 का उल्लंघन है इसलिए अगर श्रीमती बुच में थोड़ी भी शर्म होगी तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। श्रीमती बुच मार्केट की रेगुलेटर हैं, सेबी की चेयरपर्सन हैं, तब भी आईसीआईसीआई बैंक से वेतन कैसे ले सकती हैं।

साल 2017-2024 के बीच इन्होंने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल से 22,41,000 रुपए क्यों लिए। आखिर वह आईसीआईसीआई को क्या सेवाएं दे रही थीं। प्रधानमंत्री मोदी से हमारा सवाल और उन्हें इसका जवाब देना चाहिए। प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री से सवाल किया और कहा, प्रधानमंत्री आप जब रेगुलेटरी बॉडी के प्रमुखों की नियुक्ति करते हैं तो उनके लिए क्या उचित मानदंड रखते हैं।

क्या प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एसीसी के सामने चेयरपर्सन की नियुक्ति से पहले या बाद में उनके बारे में ये चौंकाने वाले तथ्य आए थे। क्या श्री मोदी को पता था कि श्रीमती बुच सेबी के कार्यकाल में लाभ के पद पर होने के बावजूद आईसीआईसीआई से सैलरी ले रही थीं।

क्या श्री मोदी को मालूम है कि सेबी प्रमुख और पूर्णकालिक सदस्य के रूप में वह आईसीआईसीआई के खिलाफ शिकायतों का निपटारा कर रही थीं और साथ ही आईसीआईसीआई से इनकम ले रहीं थीं।

उन्होंने सेबी से भी पूछा, क्या आईसीआईसीआई ने किसी भी जगह सेबी के मेंबर को वेतन देने की बात सार्वजनिक की। आईसीआईसीआई सेबी की चेयरपर्सन को सैलरी देने की आड़ में क्या सुविधा ले रहा था।

आखिर आईसीआईसीआई बैंक ने सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी क्यों नहीं दी। बैंक ने ईएसओपी के नियम का उल्लंघन कर इनको लाभ क्यों दिए। इससे पहले हिंडरबर्ग रिपोर्ट में उनकी कंपनियों से अडाणी की विदेशी कंपनियों से सांठ गांठ का आरोप लग चुका है।