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किसान परेशान महंगे दाम, आम आदमी हैरान

सब्जियों की बढ़ती कीमत के बीच कारोबारी नजर आलू पर


  • बाजार में आम आदमी की सब्जी महंगी

  • सफेद आलू दूसरे राज्यों में जाने लगी है

  • कारोबारी जमाखोरी कर उठा रहे मुनाफा


राष्ट्रीय खबर

सिलीगुड़ी: सफेद ज्याति किस्म के आलू विदेशों में ऊंचे दामों पर जा रहे हैं। उत्तर में लाल हॉलैंड आलू की कीमत बढ़ रही है। आरोप है कि व्यवसायियों के एक वर्ग ने मौके का फायदा उठा रहा है और बाजार में कृत्रिम संकट पैदा कर रहा है। इसलिए कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त भंडारण के बावजूद यहां आलू महंगा हो गया है।


 

इस बीच जब निचले तबके के आम लोग आग के दाम में दूसरी सब्जियां खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं तो आलू की कीमत बढ़ गयी है।

व्यापारियों के सूत्रों के अनुसार उत्तरी सफेद ज्योति किस्म का आलू केवल बाहरी राज्यों में जाता है। पिछले दो वर्षों में उत्तर में आलू की अच्छी पैदावार नहीं हुई है।

एक ट्रक आलू की कीमत 55,000 से गिरकर 60,000 रुपये हो गई। इस बार बाहरी राज्यों में उत्तरी सफेद आलू की मांग अचानक बढ़ने से कारोबारियों की तो लॉटरी लगने जैसी स्थिति हो गयी है। इस बीच प्रति ट्रक आलू की कीमत छह लाख रुपये तक पहुंच गयी है।

किसान सूत्रों के मुताबिक पिछले दो साल में आलू की कीमत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्हें एक ट्रक आलू की कीमत 55 हजार से 60 हजार रुपया तक मिली।

तीन बीघे में 100 क्विंटल आलू पैदा होता है। वह एक ट्रक में 200 पैकेट पैक किए गए हैं। उस आलू की प्रति बीघे उत्पादन लागत लगभग 30 हजार रुपया है। तीन बीघे में 90 हजार रुपये की लागत आई। लेकिन पिछले दो वर्षों में मेले में 60,000 रुपया की कीमत पर 30,000 रुपया का नुकसान हुआ।
स्थिति इतनी खराब हो गई कि किसानों को खाने के लिए आलू छोड़ना पड़ा। क्योंकि, एक बीघे जमीन का आलू तोड़ने में करीब पांच हजार रुपया का खर्च आता है।

कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, उत्तर बंगाल में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है। इसकी अधिकांश खेती जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार और उत्तरी दिनाजपुर जिलों में होती है। यह मूलतः उत्तरी आलू उत्पादक इलाका है।
नॉर्थ बंगाल पोटैटो ट्रेडर्स एसोसिएशन के अधिकारियों का दावा है कि आलू की खेती वाले इलाके में जितना आलू पैदा होता है, उसका भंडारण उत्तर के साठ कोल्ड स्टोरेज में नहीं किया जा सकता।
20 लाख टन आलू का भंडारण है। यहां दोगुना आलू पैदा होता है। इसलिए, यदि आधा आलू दूसरे राज्यों में नहीं भेजा जा सका, तो फ़्रीज़र में नो रूम की स्थिति होना तय है।

इस बीच पिछले सीजन में आलू का उत्पादन काफी घट गया है। तो वहीं कोल्ड स्टोरेज में 15 लाख टन का स्टॉक है।
उत्तरी सफेद आलू की मांग बिहार, झारखंड और दक्षिण बंगाल में भी बढ़ी है। इसलिए कीमत थोड़ी बढ़ गई है। कुल मिलाकर प्रतिदिन डेढ़ सौ ट्रक आलू उत्तर बंगाल से बाहर जा रहा है।

 

व्यापारियों का दावा है कि आलू बाहर भेजना शुरू होने से बाजार मजबूत हुआ है। इसलिए बढ़ी है कीमत जलपाईगुड़ी के धुपगुड़ी ब्लॉक के गदांग इलाके के आलू किसान नित्यानंद बर्मन ने शिकायत की कि क्या लाल हॉलैंड किस्म के आलू की कीमत 20 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाएगी? व्यापारी किसानों से कम दाम पर आलू खरीद रहे हैं और इस तरह का सस्ता कारोबार कर चार गुना मुनाफा कमा रहे हैं।