Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
MP Board Result Scam: 12वीं की छात्रा को मिले थे मात्र 3 अंक, रिचेकिंग में बढ़े 60 अंक; बोर्ड की कार्... Ratlam News: इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद 17 वर्षीय किशोरी से जबरन निकाह; आरोपित ईरशाद शेख के खिलाफ ... Bhopal High-Profile Case: सीसीटीवी, व्हाट्सएप चैट और चोट के निशान; CBI के सवालों में घिरीं पूर्व जज ... Chhatarpur News: न्याय न मिलने से आहत युवती ने थाने में किया आत्मदाह का प्रयास; पुलिस की कार्यशैली प... Rajgarh News: शादी के 15 दिन बाद ही दुल्हन हुई रफूचक्कर; 2 लाख रुपये ठगने वाले 'लुटेरी दुल्हन' गिरोह... Weather Update: दिल्ली-यूपी सहित उत्तर भारत में झमाझम बारिश का अलर्ट; आंधी और ओलावृष्टि से गिरेगा पा... Ghazipur Murder Case: होटल कारोबारी के बेटे की गोली मारकर हत्या; कटरा गैंग पर आरोप, कोतवाल लाइन हाजि... Punjab Government Big Decision: पंजाब में खत्म हुई ठेकेदारी प्रथा; 65,000 कर्मचारियों को मिलेगी पक्क... Dhamtari News: सराफा कारोबारी के साथ 70 लाख की धोखाधड़ी; कारीगर का बेटा जेवर लेकर हुआ फरार Katihar News: कटिहार में शव के साथ ग्रामीणों का संघर्ष; कमला नदी पार कर करना पड़ा अंतिम संस्कार

सूखे में भी पैदावार करने वाली गेहूं की नई प्रजाति विकसित

  • पौधे की ऊंचाई इससे कम होती है

  • पानी की जरूरत भी खेत में कम पड़ती

  • अनाज के दानों पर कोई असर नहीं पड़ता

राष्ट्रीय खबर

रांचीः भोजन का संकट पूरी दुनिया पर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसका दबाव किसानों पर भी है। वे अधिक पैदावार के लिए जमीन में अधिक उर्वरक डाल रहे हैं। इन उर्वरकों का भी पर्यावरण और अनाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हुआ देखा गया है। इन चिंताओँ से युक्त कृषि जेनेटिक वैज्ञानिकों ने एक नई तरकीब आजमायी है।

इस तरकीब से ऐसे गेंहू का विकास किया जा रहा है जो कम पानी अथवा सूखे की स्थिति में भी अपनी पैदावार को कम नहीं होने देगी। प्रारंभिक परीक्षण के आधार पर यह माना गया है कि इसका उपयोग पूरी दुनिया में वैसे स्थानों पर भी हो सकेगा, जहां सिंचाई के लिए पानी की कमी है। इस परिस्थिति में भी यह गेहूं सही फसल देगी। इस जेनेटिक बदलाव में सिर्फ गेहूं के पौधों की ऊंचाई कम होगी और उन्हे सूखी मिट्टी वाले इलाके में भी बोआ जा सकेगा। इससे बीज से पौधा बनने के लिए जरूरी नमी अथवा पानी की आवश्यकता कम हो जाएगी।

जिस जीन पर यह फेरबदल किया गया है, उसे वैज्ञानिक परिभाषा में आरएचटी13 कहा गया है। यह मूल रूप से पौधे की ऊंचाई बढ़ाने में सहायक है। दूसरी तरफ पौधे की ऊंचाई अधिक होने की वजह से ही उसे पानी की अधिक जरूरत पड़ती है। कम ऊंचाई की हालत में उसकी अपनी पानी की जरूरत खुद ब खुद कम हो जायेगी।

अंतर्राष्ट्रीय शोध दल ने जॉन इंस सेंटर के साथ मिलकर इस प्रयोग को किया है। इसका सफलता पूर्वक परीक्षण किया जा चुका है। अच्छी बात यह है कि इसे गेंहू की दूसरी प्रजातियों के साथ भी उगाया जा सकता है। यह पाया गया है कि इसकी वजह से पैदावार की गति तेज हो जाती है और पौधों की ऊंचाई कम होने की वजह से सूखे की हालत में भी किसानों को परेशानी नहीं होती। अब उम्मीद की जा रही है कि पूरी दुनिया में मौजूद गेंहू की तमाम प्रजातियों पर इस जेनेटिक बदलाव को आजमाकर सफलता पायी जा सकती है।

इस बारे में शोध केंद्र के डॉ फिलिपा बोरिल ने कहा कि इसे एक तरीके से गेंहू की फसल को बौना करने की प्रक्रिया भी माना जा सकता है। इस बदलाव से मौसम की प्रतिकूलता का प्रभाव गेंहू की खेती पर बहुत कम होगा और सूखे में भी पानी के अभाव में पूरी फसल नष्ट नहीं होगी।

पहले अधिक ऊंचाई के अनाज के पौधों को बढ़ावा इसलिए दिया गया था ताकि हर पौधे से अधिकाधिक अनाज हासिल किया जा सके। साठ के दशक का ग्रीन रिवोल्युशन इसी प्रयास का नामं था। अब बदली हुई परिस्थितियों और आबादी की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए नई तकनीक पर काम हो रहा है।

खेती की लागत बढ़ने की वजह से अनाज के खराब होने का नुकसान अधिक होता है। अब कृषि से जुड़े जेनटिक वैज्ञानिक इस नुकसान को भी इस विधि से कम करना चाहते हैं। परीक्षण में यह पाया गया है कि इस जेनेटिक बदलाव की वजह से पौधे का यह जीन उसमें उगने वाले दानों पर कोई उल्टा प्रभाव नहीं डालता है। जहां की जमीन अपेक्षाकृत अधिक सूखी हुई है, वहां भी इनके पौधों को अधिक गहराई में रोपा जा सकता है।

इस परीक्षण के सफल होने के बाद ऑस्ट्रेलिया के सीएसआईआरओ के वैज्ञानिक भी इस पर आगे शोध कर रहे हैं। पहले यह माना गया था कि जेनेटिक तब्दीली की वजह से अनाज की उपज पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस एक जीन में संशोधन ने उस आशंका को दूर कर दिया है।