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विश्वासमत के बाद फिर से तबादले का खेल

अफसरों का गिरोह जुटा है अपनी गोटी सेट करने में


  • जिला स्तर पर ट्रांसफर की चर्चा होने लगी

  • तबादले की ऊंची दुकान खुली तो ठेकेदार सक्रिय

  • चुनाव के पहले भाजपा की मदद की साजिश


राष्ट्रीय खबर

रांचीः हेमंत सरकार के विश्वासमत और मंत्रिमंडल के पुनर्गठन का लाभ भी अफसरों का गिरोह उठाना चाहता है। इसके लिए पहले से ही तबादले की दुकान खुल गयी है। अंदरखाने की सूचनाओँ के मुताबिक जिला के डीसी और एसपी तक के तबादले को टटोला जा रहा है और कुछ अपने लोगों को महत्वपूर्ण जिलों में फिर से पदस्थापित करने की साजिश रची जा रही है।

पहली बार इस बात की भी खबर आ रही है कि सरकार को गुमराह करने के लिए इस बार गिरोह के प्रमुख लोगों ने पहले से ही हाईकोर्ट के वकीलों तक को सेट कर रखा है। इसका असली मकसद सरकार द्वारा कानूनी मंतव्य मांगे जाने की स्थिति में रिपोर्ट को अपने पक्ष में करना है।

वैसे बता दें कि कई प्रमुख लोगों के खिलाफ महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं और इन मामलों पर कभी भी गलती करने पर राज्य सरकार की फजीहत के साथ साथ अदालत की अवमानना का नोटिस भी जारी हो सकता है। वैसे इस साजिश के पीछे सरकार की व्यवस्था को अस्थिर कर भाजपा के लिए जमीन मजबूत करना भी है क्योंकि साजिश में सक्रिय कई अफसर एक साथ कई राजनीतिक दलों के नेताओं से बेहतर संपर्क साधकर चल रहे हैं।

जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में करीब आते विधानसभा चुनाव के नाम पर तबादले की यह दुकान खुल गयी है और इसमें अजीब अजीब किस्म का दावा किया जा रहा है। बता दें कि जिलों में उपायुक्त और एसपी के पदस्थापन में वरीयता क्रम का निर्धारण भी होता है। इसकी एक प्रथा पहले से चली आ रही है। इस नियम को देखते हुए संभावित अफसरों से खैर जानने के नाम पर दुकानदारी टटोलने का काम तेज हो गया है। यह इसलिए भी हो रहा है क्योंकि हेमंत सरकार अभी विश्वास मत हासिल करने के बाद मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की राजनीति में उलझी हुई है।

पहले यह चर्चा थी कि इस गिरोह ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी तक को बदलने की तैयारी कर ली थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी हर स्तर पर होने की वजह से शायद इस साजिश को बीच में ही छोड़ दिया गया। इस गिरोह के गतिविधियों की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक इस स्तर पर फेरबदल का प्रस्ताव हेमंत सरकार के फायदे में नहीं होता देख, इसे स्थगित किया गया है।

वैसे कुछ खास अफसर गाहे बगाहे नेताओं से कुशल क्षेम पूछने के बहाने भी इस संभावना को अब भी टटोल रहे हैं। दूसरी तरफ सत्ता समीकरणों की जानकारी रखने वालों के मुताबिक वर्तमान मुख्य सचिव और डीजीपी को बदलना हेमंत सरकार के जातिगत समीकरणों में फिट नहीं बैठेगा। साथ ही हाल के लोकसभा चुनाव के दौरान भी दोनों की भूमिका ऐसी नहीं रही है, जिससे सरकार को इनसे कोई परेशानी हो।