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टीएमसी को भ्रष्टाचार पर कोसा नरेंद्र मोदी ने

पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में नहीं लिया ममता का नाम


  • इनका काम सिर्फ पैसा वसूलना है

  • अब भी सीमा पार से घुसपैठ जारी

  • सिर्फ वोट बैंक को खुश किया है


राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः प्रधानमंत्री ने बंगाल की आखिरी बैठक से ही अंदाजा लगा लिया है कि 4 जून के बाद बंगाल और पूरे देश में क्या होगा। तृणमूल, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर साधा निशाना लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बंगाल में आखिरी रैली की। काकद्वीप की उस सभा में आधे घंटे के भाषण में उन्होंने एक बार भी राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम नहीं लिया।

अभिषेक बनर्जी ने उनका नाम भी नहीं लिया। इसके अलावा, काकद्वीप में बैठक में प्रधान मंत्री की टिप्पणी, लोकसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भारत की राजनीति अस्थिर हो जाएगी। परिवारवादी विपक्षी दल दिग्भ्रमित हो जायेंगे।

मोदी ने बुधवार को एक साथ तीन केंद्रों पर उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया। इनमें डायमंड हार्बर भी शामिल था। तृणमूल ने पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव और महासचिव अभिषेक को केंद्र में उतारा है।

हालांकि, इस जनसभा में उनके निशाने पर तृणमूल और कांग्रेस समेत राष्ट्रीय स्तर की सभी विपक्षी पार्टियां रहीं। काकद्वीप सभाओं से लेकर तोषण तक, कटमनी से लेकर मुसलमानों को ओबीसी प्रमाण पत्र देने और बंगाल में घुसपैठियों पर लगाम कसने तक, प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा। वे केवल जबरन वसूली और कट मनी के बारे में सोचते हैं।

मैं सभी जमीनी स्तर के कार्यों में कटौती चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि बच्चों के मध्याह्न भोजन में भी कटौती की जाये। लेकिन ऐसा करते समय उन्होंने पूरे भाषण में एक बार भी ममता या अभिषेक का नाम नहीं लिया। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बंगाल की आखिरी बैठक से ही भविष्यवाणी कर दी कि 4 जून के बाद बंगाल और पूरे देश में क्या होगा।

तृणमूल, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा। मोदी ने कहा, 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद देश की राजनीति में उथल-पुथल मच जाएगी। पितृसत्तात्मक पार्टियाँ स्वयं ही दिग्भ्रमित हो जायेंगी। उन पार्टियों के कार्यकर्ता भी हांफ रहे हैं, वे भी पार्टी छोड़ देंगे।

वहीं, काकद्वीप रैली में मोदी स्पष्ट ध्रुवीकरण संदेश देते दिखे। उन्हें चापलूसी और जनसांख्यिकी बदलने के आरोपों के साथ तृणमूल पर हमला करते देखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने घुसपैठियों को लाकर सीमावर्ती इलाकों की जनसांख्यिकी बदल दी है और तृणमूल ने वोट बैंक को खुश करने के लिए ऐसा किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, घुसपैठिए बंगाल में आ रहे हैं और आपकी जमीन छीन रहे हैं। युवाओं के अधिकार छीन रहे हैं। पूरा देश चिंतित है। बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना बदल गई है। उन्होंने सीएए पर झूठ क्यों बोला, इसका विरोध क्यों किया? घुसपैठियों को अंदर आने देना। तृणमूल हिंदू शरणार्थियों को जगह नहीं देगी। मतुआ को रहने नहीं देना चाहते। 4 जून के बाद तृणमूल की सारी हवा निकल जायेगी।