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तू छुपी है कहां मैं तड़पता .. .. ..

चुनावी चंदे का सवाल है बाबा। कहां छिपाया है सारा माल और किससे वसूला है यह दान। प्याज की तरह परत दर परत कहानियां बाहर आ रही हैं और ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा का दावा धीरे धीरे ढहता जा रहा है। भाई कोई मुझे भी यह फार्मूला समझा दे, जिससे अडाणी आसमान की बुलंदियों पर पहुंच गये और एक कंपनी ने अपने मुनाफे से ज्यादा चंदा दे दिया।

काश कि ऐस हमलोगों के साथ भी होता तो हम भी अमीरी में चार चांद लगाकर उड़ रहे होते। जय हो माई लॉर्ड बाबा लोगों की। सब तरफ से दरवाजा बंद था तो एक धक्का मारा कि सभी चारों खाने चित हो गये। अब एक आंकड़ा आया तो बाकी आंकड़ों की बात होने लगी। सीलबंद लिफाफा भी खोलने का फरमान जारी हो गया।

हर बात की काट खोजकर तुरंत बयान जारी करने वाले अभी सोच में पड़े है। डर इस बात का है कि एक बयान देने के बाद अगर कोई नई बात बाहर आ गयी तो उसे कैसे समेट पायेंगे। बहुत टेंशन हो रहा है। यह सब अभी इलेक्शन के टैम में ही होना था। इंडियन मैंगो मैन बड़ा सनकी होता है पता नहीं कब उसका दिमाग फिर जाए और सारा गुड़ गोबर कर दे।

इसी बात पर एक पुरानी फिल्मी गीत याद आने लगी है। वर्ष 1959 में बनी इस फिल्म नवरंग के लिए इस गीत को लिखा था भरत व्यास ने और संगीत में ढाला था सी रामचंद्र ने। इसे लता मंगेशकर और मन्ना डे ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

तू छुपी है कहाँ मैं तड़पता यहां
तेरे बिन फीका फीका है दिल का जहां
तू छुपी है कहाँ मैं तड़पता यहां
तू गयी उड़ गया रंग जाने कहाँ
तू छुपी है कहाँ मैं तड़पता यहां
मिलते मिलते में जब ना मुझे तुम मिले
साँस लेती हु ??? इस सुनसान में
इन् बहरों जब ना तुझे प् सकीय
इन् बहरों जब ना तुझे प् सकीय
तोह तड़पती हु इस वीरन में
तेरे बिन फीका फीका है दिल का जहां
तू छुपी है कहा मैं तड़पता यहां
यह नजरें दीवानी तुकोइ हुई
मेरे रंगीन सपनों के रंगो में
उमंगो में जब ना तुझे प् सकरर
उमंगो में जब ना तुझे प् सकरर
ढुंढतॉर हू मै घुम की तरंगो में
तेरे बिन फीका फीका है दिल का जहां
तू छुपी है कहाँ तू छुपी है कहाँ
तू छुपी है कहाँ तू छुपी है कहाँ
मै छुपा हुं पिया तेरी कंकण में
तेरी हर सांस में मई छुपी हो कहाँ
दर्द के हाथो घुम से भरा साज सुन
मेरे रौंदे हुए दिल की आवाज सुन
जब तलक तेरा मेरा ना होगा मिलान
मे जमीन आसमान को हिलाती रहूंगी
आखरी आस तक खुद तड़पुँगी और तडपती रहूँगी
यह कौन घुँघरू झाँका
यह धरती पे आसमान आ गया पूनम का
यह कौन फूल महके
महफ़िल में एक खुशबु उड़ी
लो तन में जान आयी
मेरी चकोरी चांदनी में करके स्नान आयी
बिछडा वह मित आया
दो आस्मओँ के मिलान दिन पुनीत आया
सूरत है मेरे सपनो की तू सोहिणी
जमुना तू ही है तू ही मेरी मोहिनी
तेरे बिन फीका फीका है दिल का जहां
तू छुपी है कहाँ तू छुपी है कहाँ
तू छुपी है कहाँ तू छुपी है कहाँ।

अब तो इनकम टैक्स और ईडी वालों को भी जवाब देना पड़ेगा कि भाई आखिर आपलोगों के रेड के बाद ही कई लोगों ने चुनावी बॉंड खरीदकर किसे चंदा दिया और चंदा मिलने के बाद आपकी जांच की गाड़ी धीमी कैसे पड़ गयी। हमेशा दूसरों से सवाल पूछने वाले अब खुद ही सवालों के घेरे में आ गये हैं। आरोप तो यह है कि धंधा चाहिए तो चंदा दो।

यानी रिश्वतखोरी का इतना खुला खेल इससे पहले कभी नहीं हुआ था। अब यह भी जांच का विषय बन गया है कि पुलवामा हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान की कंपनी ने भी चुनावी बॉंड क्यों खरीदे। भाई लोग बहुत झंझटिया हैं। खोज लिया है कि इस चुनावी बॉंड में एक गुप्त कोड होता है जो अल्ट्रा वॉयोलेट किरणों में दिखता है। अब इस कागज को तैयार जिनलोगों ने किया है यानी भारतीय स्टेट बैंक को क्या यह पता नहीं था या जान बूझकर झूठ बोल रहे थे।

जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, सवाल और बड़े होते जा रहे हैं। उम्मीद है कि आज चुनावों का एलान भी हो जाए और आचार संहिता लागू हो जाए। ऐसे में जो सवाल है, वे भी चुनावी मोर्चे पर कमाल कर सकते हैं, इसका कोई एहसास भी है या नहीं। बेचारे एसबीआई के चैयरमैन। अब तो कर्मचारी महासंघ भी उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। देखते हैं कहां का पानी किधर जा रहा है।