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शुभकरण के सर से छर्रे पाये गये हैं

सादे कपड़ों में भी मौजूद थी हथियारबंद हरियाणा पुलिस

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसानों के दिल्ली चलो मार्च के दौरान खनौरी बॉर्डर पर पिछले हफ्ते हरियाणा पुलिस के झड़प के दौरान किसान शुभकरण सिंह की मौत हो गई। पंजाब पुलिस ने इस केस में हत्या का मामला दर्ज किया गया। शुभकरण सिंह का पोस्टमार्टम कर लिया गया है जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि उसकी मौत बंदूक से चोट लगने के कारण हुई। इसके साथ ही उसके सिर में बाहरी तत्व भी पाए गए। पोस्टमार्टम से पहले शिवकरण सिंह का सीटी स्कैन भी किया गया था जिसमें उसके सिर में छर्रे भी पाए गए। पिछले हफ्ते पटियाला के अस्पतालों से जारी की गई मेडिकल लीगल रिपोर्ट्स में कहा गया कि पुलिस कार्रवाई में घायल हुए कई प्रदर्शनकारियों के ऊपरी शरीर पर छर्रों के घाव पाए गए थे।

इस बीच किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि अगर पहले ही पंजाब पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई की होती तो शुभकरण आज जिंदा होता। बॉर्डर पर सादी वर्दी में उन्होंने हरियाणा पुलिस का एक कर्मी पकड़ा था, जो खुद ही पुलिस पर पथराव कर रहा था, ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके।

एरिया के संबंधित थाने में उन्होंने शिकायत भी दी थी, इसके बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगर पंजाब पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो वहां माहौल नहीं बिगड़ता व पुलिस के साथ टकराव भी नहीं होता। इससे शुभकरण भी आज जिंदा होता। सिरसा के साथ युनाइटेड सिख के निदेशक अमृतपाल व गुरप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।

सिरसा ने कहा कि जानबूझकर माहौल बिगाड़ने का काम किया गया, इसलिए पुलिस कार्रवाई की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। लंगर व पानी बांट रहे हमारे नौजवानों को भी नहीं छोड़ा गया और मारपीट करके बुरी तरह से उन्हें घायल कर दिया गया। सिरसा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने उनके साथ धोखा किया है। पिछले किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने केंद्र की मांगों पर अपना आंदोलन मुअत्तल किया था, लेकिन इसे खत्म नहीं किया था।

गुरमोहन ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस अगर अपना फर्ज निभाती तो आज स्थिति कुछ और होती। हालांकि उन्होंने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया हुआ है और प्रमुखता के साथ अपना पक्ष रखने के अलावा न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए तमाम सीमाएं लांघ दीं।

रबड़ बुलेट के साथ ही असली गोलियां भी चलाई गईं और इसके उनके पास सबूत भी हैं। तमाम मानवीय मूल्यों की अनदेखी की गई। साथ ही उन्होंने पंजाब के अधिकार क्षेत्र से हरियाणा पुलिस द्वारा किसानों की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए और पंजाब सरकार की इसके प्रति उदासीनता पर भी अपना रोष जाहिर किया।

गुरमोहन ने कहा कि वह जीरो एफआईआर से सहमत नहीं हैं। अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अगर लोकतंत्र की भावना को बचाना है तो सीएम हरियाणा व गृहमंत्री के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हरियाणा पुलिस के पासपोर्ट रद्द करने की चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि यह हरियाणा पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

हरियाणा के किसान नेता अशोक बल्हारा ने कहा कि हरियाणा के किसान पूरी तरह से पंजाब के किसानों के साथ हैं और जल्द ही वह प्रदेश भर में मांगों के समर्थन में धरने शुरू करेंगे। यह आंदोलन सभी किसानों का है, इसलिए सभी संगठनों को मतभेद बुलाकर साथ आना चाहिए और मिलकर आंदोलन की आवाज बुलंद करनी चाहिए।