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सुप्रीम कोर्ट का फैसला आप प्रत्याशी के पक्ष में

भाजपा की दोहरी कोशिशों पर एक साथ फिर गया पानी


  • इन्हीं मतपत्रों की दोबारा गिनती होगी

  • आप के प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित

  • अनिल मसीह पर कार्यवाही प्रारंभ


राष्ट्रीय खबर

नईदिल्ली: भाजपा की दोहरी साजिशों को सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ धराशायी करते हुए चंडीगढ़ मेयर चुनाव का फैसला सुना दिया। भाजपा ने पहले चुनाव अधिकारी के जरिए विरोधी पक्ष के आठ वोट अवैध घोषित कराये थे। उसके बाद जब भाजपा को लगा कि मामला फंस जाएगा तो उन्होंने आम आदमी पार्टी के तीन पार्षदों को अपने पक्ष में कर लिया। इससे समझा गया था कि अगर फिर से चुनाव होता है तो संख्याबल भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में ही होगी।

शीर्ष अदालत ने पूरे मामले पर दो दिन तक विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया है कि पीठासीन अधिकारी द्वारा निशान लगाये गये सभी आठ मतपत्र आप के मेयर प्रत्याशी के पक्ष में गिने जाएंगे उच्चतम न्यायालय ने चंडीगढ़ महापौर के  30 जनवरी को हुए चुनाव में चुनाव अधिकारी द्वारा गलत तरीके से निशान लगाए और फिर अवैध घोषित किए गए मतपत्रों को मंगलवार को वैध घोषित करते हुए कहा कि वह फिर से उनकी गिनती करने का निर्देश देगा। दोबारा उन्हीं मतपत्रों की गिनती का परिणाम क्या निकलेगा, यह स्पष्ट है। इसलिए आप से भाजपा में गये तीन पार्षदों का भी कोई फायदा अब भारतीय जनता पार्टी को नहीं मिल पायेगा।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि चंडीगढ़ महापौर चुनाव में चुनाव अधिकारी अनिल मसीह द्वारा चिह्नित किए गए सभी आठ मतपत्र आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में हैं।   शीर्ष अदालत ने सोमवार को इस मामले में पंजाब सरकार की उस याचिका को भी अनुमति देने का संकेत दिया, जिसमें बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर नए सिरे से मतदान के बजाय मतों की दोबारा गिनती की अनुमति देने की गुहार लगाई गई थी।

पीठ ने गत 30 जनवरी को हुई मतों की गिनती के दौरान चुनाव अधिकारी द्वारा मतपत्रों पर निशान लगाने के मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि चुनावी लोकतंत्र में हस्तक्षेप करना सबसे गंभीर बात है और इसके लिए मुकदमा चलाया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने इस बीच आम आदमी पार्टी के तीन पार्षदों के रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का मामला सामने आने के बाद इस कथित खरीद-फरोख्त पर चिंता व्यक्त की थी और कहा था, हम जानते हैं कि क्या हो रहा है। हम खरीद-फरोख्त को लेकर बेहद चिंतित हैं।

जो हो रही है, वह बहुत परेशान करने वाली बात है। सुनवाई के दौरान पीठ ने चुनाव अधिकारी मसीह से भी पूछा कि उन्होंने मतपत्रों को विकृत क्यों किया। शीर्ष अदालत ने चुनाव अधिकारी से कहा, वीडियो से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि आप कुछ मतपत्रों को देखते हैं। ऊपर या नीचे क्रॉस का निशान लगाते हैं।

पीठ ने उनसे पूछा, आपने मतपत्र पर क्रॉस का निशान लगाया है। यह बहुत स्पष्ट है कि आप कुछ मतपत्रों पर क्रॉस का निशान लगा रहे हैं। आपने कुछ मतपत्रों पर क्रॉस का निशान लगाया है या नहीं। इस पर अधिकारी ने कहा, आम आदमी पार्टी पार्षद इतना शोर मचा रहे थे- कैमरा! कैमरा! कैमरा! इसलिए मैं उधर देख रहा हूं कि वे किस कैमरे की बात कर रहे हैं।

मतदान के बाद मुझे मतपत्रों पर संकेत लगाना पड़ा। चुनाव अधिकारी ने आगे कहा, जो मतपत्र विरूपित ( निशान) थे, मैं सिर्फ इस बात पर प्रकाश डाल रहा था कि इसे दोबारा नहीं मिलाया जाना चाहिए। यही एकमात्र कारण था। पीठ ने कहा, जैसा कि अधिकारी ने स्वीकार किया कि उसने मतपत्रों को विरूपित कर निशान लगाया। उनका जवाब बहुत स्पष्ट है। उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

एक पीठासीन चुनाव अधिकारी द्वारा चुनावी लोकतंत्र में हस्तक्षेप करना सबसे गंभीर बात है। गौरतलब हैं कि चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर को कुलदीप कुमार को मिले 12 मतों के मुकाबले 16 मतों हासिल करने के बाद महापौर पद पर निर्वाचित घोषित किया गया था। मतों की गिनती के दौरान चुनाव अधिकारी ने आप-कांग्रेस गठबंधन उम्मीदवार को मिले आठ मतों को अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने आज चंडीगढ़ के मेयर चुनाव के अंतिम चरण को अदालत कक्ष में देखने और वोटों की गिनती देखने का आदेश देकर इतिहास रच दिया। इसके अंत में निर्णायकों द्वारा आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को मेयर घोषित किया गया। भाजपा की दोबारा चुनाव कराने की अपील भी अदालत द्वारा ठुकरा दी गई।

अदालत ने अब अधिकारी अनिल मसीह के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। 30 जनवरी के चुनाव के बाद मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ के एक वीडियो पर बड़े पैमाने पर विवाद के मद्देनजर रिटर्निंग ऑफिसर को पहले भाजपा के अल्पसंख्यक सेल के सदस्य के रूप में हटा दिया गया था।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जो आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख भी हैं, ने कहा कि यह संविधान और लोकतंत्र की जीत है। केजरीवाल ने कहा, देश में हालात ऐसे हैं कि तानाशाही चल रही है। लोकतंत्र को कुचला जा रहा है। सभी संस्थाओं को रौंदा जा रहा है। ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लोकतंत्र के लिए बहुत मायने रखता है।