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रांची के बाजार में कई किस्म के तिलकूट सजे

भीड़ वाले अपर बाजार में पहुंच रहे हैं सालाना ग्राहक


  • साल के इसी समय बनते हैं यह

  • इस साल गुड़ का तिलकुट लोकप्रिय

  • तिल से बनी अन्य मिठाइयों की भी मांग


राष्ट्रीय खबर

रांची: शहर के बाजारों को मकर संक्रांति के त्योहार के आगे कई तरह के तिलकुट नजर आने लगे हैं। तिलकुट का बाजार साल में इसी वक्त लगता है और इस बार भी इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। मुख्य तिलकुट बाजार अपर बाजार के इलाके में हैं पर ग्राहकों की मांग को देखते हुए अब शहर के दूसरे इलाकों में भी तिलकुटों की धड़ल्ले से बिक्री होने लगी है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि बहुत अधिक भीड़ भाड़ वाले अपर बाजार इलाके में जाकर तिलकुट की खरीददारी करना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। वैसे जहां भी इसकी दुकानें लगी हैं, वहां कई किस्म के तिलकुट सजाये गये हैं। वैसे इन दुकानों में तिल से बनी दूसरी सूखी मिठाई भी है। मकर संक्रांति के ठीक पहले यह सारी मिठाइयां पारंपरिक व्यवहार उत्सव के मौसम में लोगों में लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।

बाजार में तीन किस्में तिलकुट फिलहाल नजर आ रहे हैं। जिनमें चीनी तिलकुट, गुड तिलकुट, और विशेष बादाम तिलकुट शामिल हैं। तिलकुट की कीमतें 280 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती हैं, जिसमें विभिन्न विविधता में उपलब्ध हैं। विशेष रूप से, गुड़ और चीनी से बने तिलकुट की अधिक मांग है। वैसे खोवा तिलकुट की कीमत 400 रुपये प्रति किलोग्राम है। तिल के लड्डू की कीमत 280 रुपये और तिलपत्ती की कीमत 260 किलोग्राम रुपये है।

एक तिलकुट भंडार के मालिक ने कहा, इस सीज़न के दौरान तिलकुट बेचना मौसमी सामानों की तुलना में अधिक लाभदायक साबित होता है। हमारे घर के बने उत्पादों से उच्च बिक्री को आकर्षित करने की उम्मीद है, जिसमें उत्पादन में लगभग 100 किलोग्राम तिलकुट होता है। अनेक कारीगरों को साल के इसी मौके के लिए पहले से काम पर लगाया जाता है।

तिलकुट का निर्माण एक कठिन प्रक्रिया से होकर गुजरता है, जिसमें समय भी लगता है। अपर बाज़ार के एक विक्रेता राजेंद्र केसरी ने कहा, हमारे पूर्वजों से जो व्यंजनों को सौंप दिया गया है, वे 40,000 से 50,000 रुपये का मौसमी लाभ उत्पन्न करते हैं। यद्यपि हम तीन किस्मों को तिलकुट खास तौर पर बनाते हैं लेकिन इनदिनों गुड़ के साथ बनाया गया तिलकुट अधिक लोकप्रिय होता जा रहा है।

एक क्रेता ने इसी क्रम में बताया कि साल के इसी समय वे अपर बाजार आते हैं। वरना अन्य दिनों में दूसरे सामान तो हर इलाके में उपलब्ध हैं। अपर बाज़ार में तिलकुट का सजा बाजार भी विविधता में चयन का एक स्थान है जो पसंदीदा तिलकुट को खोजने के लिए सुविधाजनक बनाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सर्दियों के मौसम के दौरान तिलकुट की खपत का समर्थन करते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन  के उपाध्यक्ष, ने काले और पीले तिल के बीजों के लाभों को उजागर करते हुए कहा, आवश्यक पोषक तत्वों और स्वस्थ वसा में समृद्ध, तिलकुट को सर्दियों की खाने के लिए बेहतर माना जाता है क्योंकि यह हृदय और कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन के लिए अच्छा है।