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सेना और बीआरओ ने एक ब्रिज को चालू कर दिया

राष्ट्रीय खबर

सिलिगुड़ीः सिक्किम की दक्षिणी लोनाक झील में आई आपदा के कारण उत्तरी सिक्किम अलग-थलग पड़ गया। सबसे ज्यादा समस्या मंगन और चुंगथांग इलाकों में है। उस इलाके में सड़क के साथ-साथ पुल भी बह गया। इसलिए उस क्षेत्र के साथ संचार को सामान्य करने के लिए, तीस्ता नदी पर ‘बेली ब्रिज’ बनाया गया था। मंगन-संगकालोंग क्षेत्र में, युद्धकालीन गतिविधियों के दौरान तीस्ता पर एक दूसरा पुल बनाया गया था।

भारतीय सेना ने यह काम सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और सिक्किम प्रशासन की संयुक्त पहल से किया है। सेना के मुताबिक, उस इलाके में तीस्ता की चौड़ाई बढ़ गई है। वहां तीस्ता करीब 600 फीट चौड़ा है। बीच में एक द्वीप जैसा भाग बन जाता है और नदी दो भागों में बंट जाती है। इसलिए उन दो भागों में दो पुलों की आवश्यकता है।

दूसरे पुल का निर्माण पहले पुल से लगभग 200 मीटर की ऊंचाई पर किया गया था। सेना ने कहा कि उन दो बेली पुलों के निर्माण से वाहनों का आवागमन सुगम हो गया। साथ ही प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री ले जाने में भी सहूलियत होगी। उत्तरी सिक्किम के जुंगुर विधायक पिंटसो लेप्चा ने दो पुलों का उद्घाटन किया।

उन्होंने भारतीय सेना, स्थानीय प्रशासन और बीआरओ अधिकारियों की मौजूदगी में इस बेली ब्रिज का उद्घाटन किया। कर्नल अंजन कुमार बसुमतारी ने कहा, ”इन दो विशाल पुलों के निर्माण में त्रिशक्तिया कोर के इंजीनियर सैनिकों और कई भारी अर्थ मूविंग प्लांट का उपयोग किया गया था।

बेली ब्रिज एक अत्यंत दुर्लभ कार्य है लेकिन सेना के पास इस कार्य की अलग से विशेषज्ञता हासिल है। बता दें कि झील के ऊपर बादल फटने से ही यह लोनाक झील अचानक फट गया था, जिससे भीषण आपदा आयी थी। इस आपदा की वजह से भारतीय सेना को भी जान माल का काफी नुकसान हुआ था। अचानक आयी बाढ़ से भारतीय सेना का गोला बारूद भी बहकर तिस्ता नदी में काफी नीचे तक चला गया था। इसकी तलाश अब भी जारी है।