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संभावित दावेदार अभी से जुटे हैं गणेश परिक्रमा में

  • गिरिडीह में आजसू का कोटा कायम

  • दो अन्य पर भी टिकट की दावेदारी

  • शेष 11 सीटों पर दूसरे भी रेस में

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड भाजपा के कई सांसदों का रिपोर्ट कार्ड शायद दिल्ली दरबार में ठीक नहीं है। इसकी भनक रांची तक भी आ पहुंची है। इस सूचना के बाद से संभावित सीटों पर अपनी अपनी दावेदारी के लिए नये लोग ताल ठोंकने लगे हैं। कई लोगों ने गुपचुप तरीके से दिल्ली का दौरा भी कर लिया है जबकि दूसरे लोग भाजपा द्वारा अभी चलाये जा रहे कार्यक्रमों के जरिए अपना चेहरा चमकाने की कोशिशों में जुटे हैं।

झारखंड भाजपा में इस चर्चा को जोर तब मिला जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की बात हुई। मंत्रिमंडल में फेरबदल में किनलोगों का पत्ता कटता है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। वैसे अगर वाकई केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल होता भी है तो इस वेकेंसी का लाभ झारखंड को नहीं मिलेगा बल्कि उन राज्यों के नेताओं की लॉटरी खुलेगी, जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

अंदरखाने में इस बात की भी चर्चा है कि झारखंड के भाजपा सांसद अपनी सक्रियता दिखाने की पुरजोर कोशिशों में जुटे हैं। इसके तहत अपने दैनिक कार्यक्रमों को भी वे सोशल मीडिया में बढ़चढ़कर प्रसारित कर रहे हैं। दूसरी तरफ धीर गंभीर किस्म के नेताओं ने खुद को इससे अलग रखा है। इन समीकरणों के बीच ही अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा की टिकट की चाह रखने वालों की संख्या काफी बढ़ गयी है। इसी वजह से वर्तमान सांसदों का खंभा खिसकाकर अपनी दावेदारी मजबूत करने का काम अब तेज हो गया है।

जानकार मानते हैं कि प्रदेश संगठन और केंद्रीय संगठन पहले से ही तमाम सांसदों के काम काज का मूल्यांकन करता आया है। अभी भी भाजपा की तरफ से कई कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इनके जरिए भी लोकसभा सीट पर नेताओँ की दावेदारी के वजन को तौला जा रहा है। वर्तमान में झारखंड के भाजपा के जो सांसद हैं, उनमें से कई का रिपोर्ट कार्ड स्तरीय नहीं होने की सूचना किसी माध्यम से लीक हो चुकी है। इसी वजह से अब टिकट के दूसरे दावेदार अपनी अपनी कोशिशों में तेजी ला चुके हैं। स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने के अलावा दिल्ली दरबार में अपने परिचितों के माध्यम से दावेदारी को मजबूत करने का खेल प्रारंभ हो गया है।

बता दें कि वर्तमान में झारखंड की कुल 14 लोकसभा सीटों में से 11 पर भाजपा के ही सांसद हैं। एक और सीट गिरिडीह से भाजपा के सहयोगी आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी चुनाव जीते हैं। इसलिए टिकट की दावेदारी 13 सीटों पर अधिक हो रही है। भाजपा के लोग भी मानते हैं कि एनडीए खेमा के कायम होने की वजह से गिरिडीह सीट पर आजसू की दावेदारी अगले चुनाव में भी कायम रहेगी। शेष सीटों में से दो में भाजपा का सांसद नहीं है, इसलिए वहां के लिए भी दावेदारी हो रही है। इनके बीच असली रस्साकसी वर्तमान भाजपा सांसदों की सीटों पर हैं, जिनके बारे में पार्टी के अंदरखाने में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि शायद अगले चुनाव में ऐसे सांसदों को दोबारा पार्टी टिकट नहीं देगी।