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बिहार में नये सिरे से पैर जमाने की तैयारी में जुटी है कांग्रेस

  • अजीत शर्मा की हाल ही में की गयी छुट्टी

  • जातिगत समीकरणों को साधने की मुहिम

  • संगठन में जान फूंकने की कवायद

राष्ट्रीय खबर

पटनाः पटना के ज्ञान भवन में 12 जून को विपक्षी दलों की की बड़ी बैठक से कांग्रेस ने अचानक किनारा कर लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सुझाव पर इस बैठक का आयोजन किया गया है। सीएम नीतीश कुमार ने इस बैठक में शामिल होने के लिए देश भर के सभी दलों को न्योता दिया है। पिछले महीने कांग्रेस ने भी कहा था कि इस बड़ी बैठक में शामिल होगी लेकिन, शनिवार को बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए कहा कि इस बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों में से कोई भी शामिल नहीं होंगे।

दूसरी तरफ बिहार में जमीन पर लेटे कांग्रेस संगठन को फिर से खड़ा करने की कवादय प्रारंभ हो चुकी है। दरअसल अखिलेश सिंह (भूमिहार समाज) को कांग्रेस ने बिहार प्रदेश का अध्यक्ष बनाकर सवर्णों को साधने की कोशिश की। लेकिन अजीत शर्मा भी उसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस को अपने पुराने कोर वोटरों के तराजू को बैलेंस करना था। बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय सदाकत आश्रम में पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई गई थी।

इस बैठक में एक तरफ जहां पार्टी के विधायक दल के नए नेता को चुना किया गया तो वहीं दूसरी तरफ जिला अध्यक्षों के साथ पार्टी के बढ़िया नेताओं ने मंत्रणा की। बैठक के बाद मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने साफ कर दिया कि 12 जून की बैठक में राहुल गांधी और मलिकार्जुन खड़गे में से कोई भी बैठक में शामिल नहीं होंगे।

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी विदेश दौरे पर हैं और 12 जून तक उनके देश में वापस लौटने का कोई कार्यक्रम नहीं है। इस मामले में नीतीश कुमार से पहले ही राहुल गांधी की बातचीत भी हो चुकी थी। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे के शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी की तरफ से किसी राज्य के मुख्यमंत्री और पार्टी के सीनियर नेता ही अगले 12 जून की बैठक में शामिल हों सकेंगे।

12 जून की बैठक के ठीक पहले बिहार कांग्रेस ने नया फैसला लेकर राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। फैसला भी कुछ ऐसा है जिसकी फिलहाल उम्मीद तक नहीं की जा रही थी। माना जा रहा है कि विपक्षी एकता की बैठक के पहले बिहार में कांग्रेस ने मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। पहले बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भूमिहार समाज के एक नेता (अखिलेश सिंह) को बैठाया गया।

अब बिहार कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद से अजीत शर्मा (भूमिहार) को हटाकर इसकी कमान एक अल्पसंख्यक (शकील अहमद खान) को दे दी गई है। शनिवार को पटना के सदाकत आश्रम में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। बड़ी बात ये कि इस बैठक में सर्वसम्मति यानि बिना किसी हील हुज्जत के शकील अहमद खान को कांग्रेस विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया। इस पद से अजीत शर्मा की छुट्टी कर दी गई है।

लेकिन कांग्रेस के विश्वसनीय सूत्रों ने कुछ और अहम जानकारी भी दी है। इसके मुताबिक कांग्रेस के दोनों बड़े पदों पर भूमिहार समाज के लोग ही थे। ऐसे में कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में एकतरफा वोटरों के गणित के साथ जाने को तैयार नहीं थी। इसीलिए भूमिहार समाज के एक नेता अजीत शर्मा की कुर्बानी दी गई। क्योंकि अध्यक्ष पद पर उसी समाज का एक नेता (अखिलेश सिंह) बैठाया जा चुका है।