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पाकिस्तान से हमें सीखने की जरूरत है

पाकिस्तान में कल हुई हिंसा से देश के अंदर अनेक लोग खुश नजर आ रहे हैं, यह अत्यंत खतरनाक मानसिकता है। दरअसल पड़ोसी के घर में आग लगने पर अपना हाथ गर्म करने की यह सोच देश को दिमागी तौर पर उस गहरे दलदल में धकेल रही है, जो बाद में भारत को भी पाकिस्तान जैसी हालत में पहुंचा देगा।

वैसे तो भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान वर्षों से द्विपक्षीय और विवादास्पद संबंधों के कारण चर्चा में रहा है। यहां तक कि इन दोनों देशों के बीच युद्ध भी हुआ है और विभाजन के समय एक विवादास्पद विषय के रूप में सामने आया था। पाकिस्तान ने भारत के साथ नेतृत्व करने वाली अदालती प्रक्रिया को नकारा है, जबकि भारत ने अपने पड़ोसी देश के खिलाफ आतंकवाद को लेकर चेतावनी दी है।

पाकिस्तान के साथी प्रशासनिक संबंध भारत के लिए एक विपरीत चुनौती है। यह देश न सिर्फ आतंकवाद को संरक्षण देता है, बल्कि आतंकी संगठनों को भी प्रोत्साहन देता है। हमने आतंकवाद के विरुद्ध कई आपातकालीन और जटिल योजनाएं बनाई हैं, ताकि ऐसे घटनाओं को रोका जा सके जो भारतीय नागरिकों के जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालते हैं।

विपरीतता यहां पर यह है कि पाकिस्तान इन योजनाओं को नकार रहा है और अपने क्षेत्रीय हितों को प्रमुखता दे रहा है। पाकिस्तान ने अपने दूसरे देशों के साथ राजनैतिक, सामरिक और आर्थिक संबंधों में भी विश्वासघात किया है। यह देश अक्सर अपने आंतरविदेशी नीति में अस्थिरता प्रदर्शित करता है, जिसके कारण द्विपक्षीय मसलों को सुलझाना मुश्किल होता है।

उदाहरण के रूप में, पाकिस्तान ने अपनी पड़ोसी देश अफगानिस्तान में आतंकवाद का समर्थन किया है और वहां के स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। यह परिस्थिति पुरे क्षेत्र के शांति और सुरक्षा को प्रभावित करती है। पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रिश्तों की मुख्य समस्या उनकी आतंकवादी नीति है।

यह देश आतंकवाद के खिलाफ सख्त नहीं है और आतंकी संगठनों को संरक्षण देता है, जिसके परिणामस्वरूप निर्धारित संगठन अपनी कार्रवाई को बचा लेते हैं। यह भारत के लिए एक सीधा खतरा है और समय-समय पर घातक हमलों का कारण बनता है। भारत ने बार-बार यह संदेश दिया है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के मुकाबले अपनी सचेतता बढ़ानी चाहिए और आतंकी कार्रवाई को रोकने के लिए संयुक्त मजबूत कदम उठाने चाहिए।

हालांकि, पाकिस्तान ने इस दिशा में सक्रिय योगदान नहीं दिया है। अभी गोवा आये पाकिस्तान के विदेशमंत्री को भारतीय विदेशमंत्री ने इसी बात पर दो टूक सुनायी है। इसके अलावा, पाकिस्तान के द्वारा भारत के खिलाफ अभियान चलाने की राजनीतिक योजना भी देखी जा सकती है। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर अपनी आपसी संघर्षवादी नीति और आतंकवादी समर्थन के माध्यम से भारतीय कश्मीर को गोलमाल बनाने की कोशिश करता है।

यह देश अपने भारत के साथ सीमा क्षेत्रों में अवैध हथियार और सैन्य बलों को समर्थन देता है, जो स्थानीय जनता की जीवन प्रणाली को प्रभावित करते हैं। पाकिस्तान के द्वारा अपनी पड़ोसी देशों के साथ नाकाम और असंवेदनशील संबंधों की उपस्थिति न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करती है, बल्कि इसका भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है।

यह हमारी प्रयासों को कमजोर करता है और विभाजन और सहयोग की बजाय दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है। वैसे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पाकिस्तान में सैन्य शासन के कुप्रभाव गहरे और व्यापक हैं। सैन्य शासन के दौरान देश में न्याय की कमी होती है, मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है और लोगों की स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

सैन्य शासन के दौरान मीडिया, न्यायिक प्रक्रिया और सिविल संस्थाओं पर नियंत्रण लगाया जाता है, जिससे सामान्य जनता की आवाज को दबाया जाता है। सैन्य शासन के दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्याय की सुरक्षा में कमी होती है। गिरफ्तारी, हिरासत में रखना, न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना, बगावती जजमेंट और अन्य मानवाधिकारों की उल्लंघन की स्थिति प्रामाणिक होती है।

इसमें सैनिकों को अधिकार होता है और उन्हें जनता पर अधिकता दिखाने की अनुमति मिलती है, जिससे लोकतंत्र को हानि पहुंचती है। लिहाजा इन दुष्परिणामों को देखने समझने के बाद भी अगर हम पाकिस्तान की लीक पर चलते हैं तो इतनी अधिक आबादी वाले देश में इससे अधिक परेशानियां पैदा हो सकती हैं।

यह तय माना जाना चाहिए कि दुनिया के अनेक विकसित देशों को भारत की तरक्की पसंद नहीं आती। भारत के आगे बढ़ने पर उनका अपना व्यापार और उनकी अर्थव्यवस्था प्रभावित होने का खतरा है। लिहाजा अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर ऐसे देश भी सीधे नहीं तो परोक्ष तौर पर भारत का हित तो नहीं चाहते होंगे।

लिहाजा पाकिस्तान में भड़की हिंसा से खुश होने की कतई जरूरत नहीं है। इस बात को समझना होगा कि पाकिस्तान की जनता को भी भारत विरोधी शिक्षा दिये जाने तथा उसके बहाने अपना उल्लू सीधा करने की चाल ने ही अब पाकिस्तान को इस हालत में पहुंचा दिया है।