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हाईड्रोजन चालित ट्रेन प्रारंभ करने की तैयारियों मे भारतीय रेल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय रेल भी अपनी तरफ से प्रदूषण कम करने तथा बिजली का खर्च घटाने पर बड़ा कदम उठाने की तैयारियों में है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना को त्वरित मंजूरी दी है। इसके तहत शीघ्र ही भारत में भी हाईड्रोजन से चलने वाले ट्रेनों का संचालन प्रारंभ हो जाएगा।

पर्यावरण संकट को देखते हुए दुनिया के कई देशों में यह व्यवस्था पहले ही लागू कर दी गयी है। अब भारतीय रेलवे इस दिशा में अंतिम तैयारियां कर रही है। अनुमान है कि यह हाईड्रोजन ट्रेन इसी साल प्रारंभ हो जाएगा। इस नये किस्म के ट्रेन के बारे में लोगों की उत्सुकता कम नहीं है।

इसलिए रेल मंत्री ने खुद ही यह स्पष्ट कर दिया है कि यह आम रेल गाड़ियों की तरह बहुत लंबी नहीं होगी। इसमें छह से आठ बॉगियां ही होंगे। इस ट्रेन की अधिकतम गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी। इससे ईंधन का खर्च बचेगा और पर्यावरण संरक्षण भी होगा। उनके मुताबिक समुद्री जल से हाईड्रोजन का इंतजाम होगा क्योंकि भारतीय समुद्री तटों का दायरा बहुत विशाल है।

इसलिए हाईड्रोजन का भंडार भी भारत के पास काफी अधिक होगा। अभी तक जर्मनी में सबसे पहले ऐसी ट्रेन चालू की गयी है। वहां अभी हाईड्रोजन से चलने वाली 14 ट्रेनें नियमित सेवा दे रही हैं।

इसकी वजह से जर्मनी को हर साल करीब 16 लाख लीटर डीजल की बचत होने लगी है। वहां भी इस श्रेणी के ट्रेनों की अधिकतम गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा ही है। जर्मनी की इस ट्रेन को फ्रांस की कंपनी एलस्टम ने तैयार किया है। यह उत्तरी जर्मनी में हर दिन एक सौ किलोमीटर का सफल करती है और इस ट्रेन के ईंधन का दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

ट्रेन में विकल्प के तौर पर ईयोन बैटरी भी है। इसलिए ईंधन की खपत के बाद सिर्फ भाप और पानी ही निकलता है, जो पर्यावऱण को नुकसान नहीं पहुंचाया है। दावा है कि ऐसे ट्रेन की टंकी अगर पूरी भरी हुई हो तो यह ट्रेन आराम से एक हजार किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है।

अब जर्मनी के बाद इटली, कनाडा, डेनमार्क, ब्रिटेन और नेदरलैंड जैसे देश भी इसे चालू करने की तैयारियों मे जुटे हैं। दूसरी तरफ चीन भी ऐसा ही ट्रेन चालू करने जा रहा है। चीन का दावा है कि उसकी ट्रेन की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी और ईंधन समाप्त होने के बाद भी वह छह सौ किलोमीटर तक की दूरी तय कर लेगी।