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क्या चीन में किसी नये वेरियंट का हमला हुआ है

  • इतना अधिक कोरोना संक्रमण सामान्य नहीं है

  • तीन साल पहले भी चीन ने गोपनीयता बरती थी

  • अनेक लोग दूसरे देशों तक यह संक्रमण ले गये हैं

वाशिंगटनः दुनिया भर के वायरस विशेषज्ञों की नजर अब चीन के कोरोना संक्रमण पर टिक गयी है। एक दिन में साढ़े तीन करोड़ से अधिक संक्रमितों का पाया जाना कोई छोटी बात नहीं है। इसी वजह से यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि क्या कोरोना वायरस ने कोई नया स्वरुप हासिल कर लिया  है, जो बहुत तेजी से लोगों के बीच फैल रहा है।

वैसे विशेषज्ञों ने इस स्थिति के आधार पर फिर से दोहराया है कि दुनिया भर अब भी कोरोना महामारी का साया पूरी तरह मंडरा रहा है। ऐसी स्थिति में असावधानी बहुत भारी पड़ सकती है। दूसरे देशों के वायरस विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि चीन अपने यहां की स्थिति और कोरोना संक्रमण के बारे में खुलकर कोई जानकारी नहीं दे रहा है।

तीन साल पहले भी चीन ने इसी तरह गोपनीयता बरतते हुए पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया था। सबसे अधिक आबादी वाले इस देश में अभी कोरोना पर क्या कुछ शोध हुआ है अथवा उसके बारे में कोई नई जानकारी है अथवा नहीं, इस बारे में चीन ने चुप्पी साध ली है। इस बीच वहां कोरोना संक्रमण को लेकर गैर सरकारी स्तर पर बहुत अधिक चर्चा होने के बाद सरकार ने दैनिक संक्रमण का आंकड़ा जारी करना बंद कर दिया है। जिससे संदेह और मजबूत हो रहा है।

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ स्टूआर्ट कैंपबेल रे कहते हैं कि घटनाक्रमों से सिर्फ यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोविड 19 वायरस का कोई नया स्वरुप बन गया है, जो चीन में तबाही मचा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक इस बारे में अधिक जानकारी चीन द्वारा नहीं दी जाती इस बारे में पक्के तौर पर कुछ कह पाना संभव नहीं है।

वैसे तीन साल पहले फैली कोरोना महामारी के बीच इस वायरस ने कई बार अपना स्वरुप बदला है, यह प्रमाणित तथ्य है। दूसरे देशों के वैज्ञानिक यह भी मान रहे हैं कि चीन की अपनी वैक्सिन शायद इस संक्रमण पर काम नहीं कर रही है। इसी वजह से लोग इतनी अधिक संख्या में संक्रमित हो रहे हैं।

अधिक आबादी वाले इस देश में शायद इस वायरस को अपना स्वरुप बदलने की खुली छूट मिली थी, जिसके बाद पूरी दुनिया पर फिर से यह संकट गहराने लगा है। ओहायो विश्वविद्यालय के वायरस विशेषज्ञ डॉ शान लू ल्यू ने कहा कि चीन में ओमीक्रॉन के स्वरुपों की तो पुष्टि हुई थी। इनमें बीएफ 7 शामिल था।

लेकिन जिस तेजी से वहां कोरोना फैला है, उससे किसी नये स्वरुप का संदेह बढ़ रहा है। वायरस विशेषज्ञों ने कहा है कि मूल वायरस के बाद डेल्टा ने सबसे अधिक तबाही पूरी दुनिया में मचायी थी। अब चीन के अपने ही पूर्व रिकार्ड टूटने और करोडों लोगों के संक्रमित होने की वजह से किसी नये और शक्तिशाली वेरियंट के तैयार होने का अनुमान है। ऊपर से चीन की गोपनीयता की वजह से वहां से निकल कर दूसरे देशों में गये लोग भी अपने साथ यह संक्रमण ले गये हैं, इसकी पुष्टि हो चुकी है। इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाच्युट्स के वायरस विशेषज्ञ जेरेमी लुबान ने कहा कि कुल मिलाकर यह साफ है कि दुनिया पर से कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है।