Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Amethi Sangrampur Case: अमेठी में 15 वर्षीय दलित किशोरी का अपहरण और जबरन धर्मांतरण, आरोपी जाबिर की त... Sonam Wangchuk Protest: वांगचुक के समर्थन में अमेरिका और यूरोप में प्रदर्शन, NEET विवाद पर शिक्षा मं... CJP Protest Live: CJP नेता आशुतोष रांका की केंद्र को चेतावनी- 'मांगें नहीं मानीं तो युवा बुरी तरह हर... Sanjay Singh Yadav Death: भाजपा नेता संजय सिंह यादव का हार्ट अटैक से निधन, सीएम मोहन और शिवराज ने जत... CJP Protest in Delhi: जंतर-मंतर पर CJP का विशाल आंदोलन, 16 मेट्रो स्टेशन बंद, CRPF तैनात Dharmendra Pradhan Resignation: कांग्रेस ने की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, जय... यह कसरत दिल को धड़कनों को सुधार देता है डेंगू से निपटने के लिए श्रीलंका में ड्रोनों का प्रयोग, देखें वीडियो यूनाइटेड किंगडम के नये प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम फर्जी नैरेटिव का तेजी से घटता असर

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया नोटबंदी के फायदे

  • इस पर आठ माह पहले विचार हो चुका था

  • जाली नोट और टेरर फंडिंग रोकने का उपाय

  • नया नोट लाने की पूर्व तैयारी कर ली गयी थी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नोटबंदी के फायदे गिनाये हैं। इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक से विचार विमर्श के बाद ही लिया गया था। सरकार द्वारा दाखिल हलफनामा में कहा गया है कि फैसला लागू करने के आठ माह पूर्व ही आरबीआई से इस पर चर्चा हो चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका का संबंध में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से नोटबंदी की संवैधानिक वैधता को लेकर सवाल पूछा था।

वैसे इस हलफनामा में उस कालाधन का कोई उल्लेख नहीं है, जिसकी चर्चा कर खुद प्रधानमंत्री ने इस नोटबंदी का एलान किया था। वैसे बाद के घटनाक्रम यह साबित कर चुके हैं कि नोटबंदी के बाद सारा धन वापस लौट गया था। इससे कालाधन का पता नहीं चल पाया। दूसरी तरफ यह सूचना भी सार्वजनिक है कि इस बीच स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन पहले से और बढ़ गया है। नये दो हजार रुपये के नोट के बाजार से गायब होने पर सफाई दी गयी है कि धीरे धीरे इनका प्रचलन समाप्त करने की कार्रवाई चल रही है।

इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा है कि आरबीआई के साथ नोटबंदी को लेकर अच्छी तरह से विचार-विमर्श किया गया था। तत्कालीन वित्त मंत्री ने संसद में बताया था कि इसपर आरबीआई के साथ परामर्श फरवरी 2016 में ही शुरू हुआ था। हालांकि, इस परामर्श और फैसले को गोपनीय रखा गया था। नोटबंदी के फैसले का बचाव करते हुए केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि यह फैसला निर्णय 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों को वापस लेने के लिए आरबीआई की सिफारिश और प्रस्तावित योजना पर आधारित था। बता दें कि  सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार और आरबीआई से नोटबंदी के फैसले पर डिटेल में जवाब मांगा था। अदालत ने कहा था कि केंद्र और आरबीआई 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले पर हलफनामा दाखिल करें। हलफनामे में सरकार ने कहा कि जाली नोट और टेरर फंडिंग से लड़ने के लिए यह कदम उठाया गया। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों की मौजूदा श्रृंखला को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार को एक विशेष सिफारिश की। आरबीआई ने सिफारिश को जामा पहनाने के लिए एक ड्राफ्ट स्कीम भी प्रस्तावित की। सिफारिश और ड्राफ्ट पर केंद्र सरकार द्वारा विधिवत विचार किया गया था।

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि इन बदलावों में अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति के लिए पेश किए गए नए बैंक नोटों के डिजाइन और स्पेसिफिकेशन में बदलाव किए गए थे। इसलिए तैयारियों में नए डिजाइनों को अंतिम रूप देना, नए डिजाइनों के लिए इंक और प्रिंटिंग प्लेट्स बनाने, प्रिंटिंग मशीनों में बदलाव शामिल हैं। केंद्र ने कहा कि यह देखते हुए कि डीमॉनिटाइजेशन की कार्रवाई को एक अकेले उपाय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह परिवर्तनकारी आर्थिक नीतियों की श्रृंखला में महत्वपूर्ण कदमों में से एक था और नकली नोटों और जरूरत से ज्यादा धन के भंडारण से लड़ने के लिए एक बड़ा कदम था।