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अन्नामलाई और भाजपा के बीच जुबानी जंग

जंतर मंतर आंदोलन की आंच चेन्नई तक आ पहुंची

पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे वह

आईपीएस की नौकरी से इस्तीफा दिया

अब भाजपा से अलग संगठन बना चुके

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः पूर्व आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने बुधवार को नई दिल्ली में सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उनकी इस टिप्पणी पर भाजपा ने भी करारा पलटवार किया।

इस साल जून में भाजपा से इस्तीफा देने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी से राजनेता बने अन्नामलाई ने एक्स (X) पर एक पोस्ट में नरेंद्र मोदी के 2011 के उस बयान को याद दिलाया, जो उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर आधी रात को हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए दिया था।

[भाजपा प्रवक्ता] सेल्वम ने पलटवार करते हुए कहा, मोदी सरकार की जिम्मेदारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है। जब भी कार्रवाई का सामना करने वाले लोग भाजपा का विरोध करते हैं, तो सरकार इस जिम्मेदारी को निलंबित नहीं कर सकती। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन संरक्षण का हकदार है और कथित उल्लंघनों की जाँच होनी चाहिए। न तो कोई राजनीतिक जुड़ाव और न ही सोशल मीडिया की लोकप्रियता किसी को कानून से छूट देती है।

अन्नामलाई द्वारा पीएम के 2011 के बयान का हवाला देने पर सेल्वम ने कहा: मोदी जी ने 2011 में रामलीला मैदान में हुई कार्रवाई की आलोचना की थी, वह बयान ऑन-रिकॉर्ड दर्ज है। लेकिन 2011 का एक उद्धरण 2026 में हर पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता तय नहीं कर सकता। उन्होंने 12 साल सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा द्वारा कथित तौर पर दुश्मन पैदा करने के अन्नामलाई के दावे को भी खारिज कर दिया।

सेल्वम ने कहा, 12 साल तक पद पर रहने से जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, इससे व्यवस्था बनाए रखने का सरकार का दायित्व खत्म नहीं हो जाता। मोदी सरकार उन नागरिकों के प्रति भी जवाबदेह है जो विरोध करते हैं और उन नागरिकों के प्रति भी जिन्हें सार्वजनिक स्थानों, परिवहन और दैनिक जीवन के सुचारू संचालन की आवश्यकता है।