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दुनिया के बदलते माहौल को देख मोल्दोवा ने फैसला बदला

अब अपनी सुरक्षा के लिए हथियार बनायेगा

चिसीनाऊः पूर्वी यूरोप का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश मोल्दोवा वर्तमान में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षात्मक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मोल्दोवा की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु (जो राष्ट्रपति माया संदू की ‘एक्शन एंड सॉलिडिटी पार्टी’ के प्रमुख नेता भी हैं) ने हाल ही में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच के दौरान यह घोषणा की कि देश की प्रो-यूरोपीय सरकार रक्षा संबंधी कानूनों में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। इन प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना है, ताकि मोल्दोवा अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बन सके।

संसद अध्यक्ष ग्रोसु ने स्पष्ट शब्दों में यह रेखांकित किया कि इन कानूनी बदलावों और घरेलू हथियार निर्माण का उद्देश्य मुख्य रूप से दोहरे उपयोग वाले उपकरणों, विशेष रूप से अत्याधुनिक ड्रोनों का उत्पादन करना है। इन ड्रोनों का उपयोग आक्रामक सैन्य गतिविधियों के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा निगरानी, आपातकालीन आपदा प्रबंधन और कृषि क्षेत्रों में आधुनिक कार्यों के लिए किया जाएगा। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या इन उत्पादित हथियारों को पड़ोसी देश यूक्रेन को भेजा जा सकता है, जो वर्तमान में रूस के साथ लंबे समय से युद्ध लड़ रहा है, तो ग्रोसु ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज करते हुए दो टूक कहा, बिल्कुल नहीं! हम इन्हें अपने लिए बनाएंगे।

मोल्दोवा की भू-राजनीतिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि यह देश एक तरफ यूक्रेन और दूसरी तरफ यूरोपीय संघ के सदस्य देश रोमानिया के बीच स्थित है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे साढ़े चार साल से अधिक लंबे युद्ध का सीधा असर मोल्दोवा पर भी पड़ा है। पिछले कुछ हफ्तों में कई संदिग्ध रूसी ड्रोन और मिसाइलें मोल्दोवा के संप्रभु हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर चुकी हैं, और उनके मलबे व अवशेष भी देश के विभिन्न हिस्सों में गिरे हैं। ग्रोसु ने सुरक्षा मंच पर चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि फरवरी 2022 में युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक मोल्दोवा के हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की कुल 88 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।

इन गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए ग्रोसु ने जनता के मन में उठ रहे उस सवाल को भी साझा किया, जिसमें लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या हमारा देश अपनी रक्षा करने में सक्षम है? उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि मोल्दोवा रातों-रात इस प्रकार की रक्षात्मक क्षमता विकसित नहीं कर सकता। पिछले 30 वर्षों के दौरान रक्षा क्षेत्र में हुए वित्तीय निवेश की अनदेखी या कमी को केवल चार वर्षों में पूरी तरह से पाटा नहीं जा सकता। अपने हवाई क्षेत्र और सीमाओं की रक्षा के लिए देश को अत्याधुनिक रडार प्रणालियों, उन्नत उपकरणों, प्रशिक्षित सैन्य कर्मियों, मजबूत संचार तंत्र और बेहतर बुनियादी ढांचे की सख्त आवश्यकता है।

इस संदर्भ में, राष्ट्रपति माया संदू का प्रशासन यह कड़ा संकल्प ले चुका है कि वर्ष 2030 तक मोल्दोवा को यूरोपीय संघ का पूर्ण सदस्य बनाया जाए। देश की भावी रक्षा योजना और रणनीतिक स्वायत्तता के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है, और इसी रणनीति के तहत संसद में जल्द ही नए कानून संशोधन प्रस्ताव पेश किए जाएंगे।