ब्राजिल अब पर्यावरण के मुद्दों पर अधिक सतर्क हुआ
ब्रासिलियाः ब्राजील के अभियोजकों द्वारा तेल दिग्गज शेल की स्थानीय सहायक कंपनी के खिलाफ दायर किया गया यह मुकदमा वैश्विक जलवायु न्याय के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह मामला दुनिया भर में इस बात की एक अनूठी मिसाल पेश करता है कि कैसे जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक मौसम की घटनाओं के लिए अब बड़ी ऊर्जा कंपनियों को भी जवाबदेह ठहराया जा रहा है।
अप्रैल और मई 2024 के दौरान दक्षिणी ब्राजील के रियो ग्रांडे डो सुल राज्य में हुई मूसलाधार बारिश ने एक अभूतपूर्व और भीषण बाढ़ को जन्म दिया था। इस प्राकृतिक आपदा के कारण लगभग 200 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि 5 लाख से अधिक लोग बेघर होकर विस्थापित होने को मजबूर हो गए थे। इस आपदा ने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, आजीविका और संपत्तियों को भारी पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था, जिसके जख्म आज भी स्थानीय आबादी के जेहन में ताजा हैं।
इस अभूतपूर्व दीवानी (सिविल) मुकदमे की रूपरेखा तैयार करते हुए अभियोजकों ने तर्क दिया है कि शेल जैसी बड़ी कंपनियों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी उनके वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के अनुपात में होनी चाहिए। वैज्ञानिक और ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में शेल का ऐतिहासिक योगदान लगभग दो प्रतिशत रहा है। इसलिए, कंपनी को उसके अतीत और वर्तमान के जीवाश्म ईंधन उत्पादन, शोधन और व्यावसायिक बिक्री से होने वाले कुल उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए।
सार्वजनिक अभियोजकों और ब्राजील के एक प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठन इन्स्टिट्यूटो प्रिजर्व द्वारा संयुक्त रूप से दायर इस मुकदमे का मुख्य उद्देश्य शेल पर 108 मिलियन डॉलर (लगभग 10.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाना है। यह मुआवजा राशि बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं से प्रभावित लोगों को हुए सामूहिक भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई के लिए मांगी गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला दुनिया भर की तेल और ऊर्जा कंपनियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
सबिन सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज लॉ की ग्लोबल क्लाइमेट लिटिगेशन निदेशक मारिया एंटोनिया टिग्रे ने इस कानूनी कदम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह वैश्विक स्तर पर अपने आप में पहली ऐसी घटना है, जहां किसी देश के राष्ट्रीय सार्वजनिक अभियोजक ने सीधे तौर पर किसी बहुराष्ट्रीय तेल कंपनी पर किसी विशिष्ट जलवायु आपदा के लिए मुकदमा दायर किया है। वर्तमान समय में दुनिया भर के विभिन्न न्यायालयों में प्रवासियों, किसानों, स्थानीय समुदायों और आपदा पीड़ितों द्वारा बड़ी प्रदूषक कंपनियों के खिलाफ इस प्रकार के कानूनी मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जो यह दर्शाता है कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु न्याय की लड़ाई अब अदालतों के गलियारों में भी मजबूती से लड़ी जा रही है।