इराक ने वापस देने से साफ इंकार कर दिया
सीरिया के जेलों में बंद है यह लोग
इराकी अभियान में पकड़े गये थे सभी
अब यह अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का मामला
बगदादः मध्य पूर्व के संवेदनशील क्षेत्र में आतंकवाद, सुरक्षा और कैदियों के प्रत्यारोपण को लेकर एक बड़ा भू-राजनीतिक विवाद सामने आया है। इराक के एक वरिष्ठ और जिम्मेदार सुरक्षा अधिकारी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर यह जानकारी दी कि इराक ने सीरिया के उस आधिकारिक अनुरोध को पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, जिसमें हाल ही में सीरियाई हिरासत केंद्रों से इराकी हिरासत में ट्रांसफर किए गए हजारों संदिग्ध इस्लामिक स्टेट (आईएस) के सदस्यों को वापस सीरिया भेजने की मांग की गई थी। इस उच्च-स्तरीय अस्वीकृति ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए इराक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कासिम अल-अबूदी ने मीडिया को बताया कि इन खतरनाक कैदियों के भविष्य, उनकी कानूनी स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले प्रभावों पर गंभीरता से चर्चा करने के लिए हाल ही में इराक, सीरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच एक उच्च-स्तरीय त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में वाशिंगटन की मध्यस्थता और उपस्थिति ने इस बात को रेखांकित किया कि यह मुद्दा केवल द्विपक्षीय न होकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
अल-अबूदी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सीरियाई सरकार ने यह पुरजोर आग्रह किया था कि उसके लगभग 4,000 नागरिकों को वापस सीरिया सौंप दिया जाए ताकि उन पर सीरियाई अदालतों में कानूनी मुकदमे चलाए जा सकें। हालांकि, देश की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद के खतरे के मद्देनजर इराक ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बावजूद, मानवीय दृष्टिकोण और कड़ी कानूनी समीक्षा के बाद, इराक ने लगभग 50 ऐसे सामान्य सीरियाई बंदियों को जरूर उनके वतन वापस भेज दिया है, जिनकी गहन जांच और तस्दीक के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया था कि उनका किसी भी रूप में इस्लामिक स्टेट (आईएस) या अन्य आतंकवादी संगठनों से कोई संबंध नहीं था।
दूसरी ओर, स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में इराक की अत्यधिक सुरक्षा वाली जेलों में बंद सीरियाई कैदियों में लगभग 400 ऐसे कुख्यात और बेहद खतरनाक लोग शामिल हैं, जिनके बारे में खुफिया एजेंसियों को पुख्ता संदेह है कि वे इस खूंखार उग्रवादी आतंकवादी संगठन के उच्च-स्तरीय और प्रमुख कमांडर या रणनीतिक सदस्य रहे हैं। यदि इन आतंकवादियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा और सख्त न्यायिक व्यवस्था के वापस भेजा जाता है, तो यह क्षेत्र में आतंकवाद के पुनरुत्थान का कारण बन सकता है।
मध्य पूर्व क्षेत्र में लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाइयों और अस्थिरता के बीच यह कैदी विवाद दोनों देशों के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील कूटनीतिक व सुरक्षा संबंधी मुद्दा बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिका को इस मामले के समाधान के लिए और अधिक कूटनीतिक प्रयास करने पड़ सकते हैं।